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बढ़ेंगी लोकसभा सीटें, आएगा परिसीमन बिल? इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र!

बढ़ेंगी लोकसभा सीटें, आएगा परिसीमन बिल? इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र!

देश की राजनीति में एक बार फिर परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। 16 अक्टूबर 2026 की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीखों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।सरकार की इस संभावित रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं। अगर प्रस्तावित विधेयकों को संसद की मंजूरी मिलती है, तो देश में लोकसभा की सीटों की संख्या, राज्यों के प्रतिनिधित्व और महिला सांसदों की भागीदारी पर बड़ा असर पड़ सकता है।

क्या इसी महीने बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार अक्टूबर के आखिरी दिनों में संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावना पर काम कर रही है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को दोबारा आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश भी की जा रही है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार डीएमके और कुछ छोटे विपक्षी दलों के साथ बातचीत कर रही है, ताकि संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन हासिल किया जा सके। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने और विधेयकों को पेश करने का अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव

इस पूरे विवाद के केंद्र में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। पहले पेश किए गए विधायी पैकेज में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को लगभग 50 प्रतिशत बढ़ाकर 816 तक करने की योजना शामिल थी।सरकार का तर्क रहा है कि सीटों की संख्या बढ़ने से सभी राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। लेकिन इस प्रस्ताव पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। खासकर दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से संसद में उनका सापेक्ष राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। 

परिसीमन क्या है और इससे क्या बदलेगा?

परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है। इसके तहत यह तय किया जाता है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी के आधार पर कौन-सा निर्वाचन क्षेत्र बनेगा और राज्यों को कितनी संसदीय सीटें मिलेंगी।भारत में लोकसभा सीटों के राज्यवार आवंटन में लंबे समय से जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के संतुलन का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है। यदि नए परिसीमन के तहत सीटों का आवंटन बदला जाता है, तो उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों के प्रतिनिधित्व में वृद्धि हो सकती है। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों ने मांग की है कि जनसंख्या नियंत्रण और विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखा जाए। 

महिला आरक्षण कानून भी है एजेंडे में

परिसीमन के साथ महिला आरक्षण का मुद्दा भी प्रस्तावित विधायी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला कानून पारित किया था। इसके लागू होने की प्रक्रिया परिसीमन और जनगणना से जुड़ी हुई है।सरकार अब इस आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है। इसके लिए संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। 

अप्रैल में संसद में क्यों अटक गया था विधेयक?

इससे पहले अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया था। संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, इसलिए केवल सामान्य बहुमत होना पर्याप्त नहीं है।विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। उनकी प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन और महिला आरक्षण को लागू करने की समयसीमा शामिल थी। अब सरकार समर्थन जुटाकर इस प्रस्ताव को दोबारा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

दक्षिण भारत के राज्यों की क्या है चिंता?

दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दलों को आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने पर अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों का राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव घट सकता है। उनका कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को इसका नुकसान नहीं होना चाहिए।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के मॉडल में सभी राज्यों की सीटें बढ़ाने की योजना थी। फिर भी अंतिम व्यवस्था क्या होगी, यह विधेयक के प्रावधानों और संसद में होने वाली चर्चा पर निर्भर करेगा।अब आगे क्या होगा?फिलहाल तीन सवाल सबसे अहम हैं—क्या केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाएगी, क्या परिसीमन विधेयक को जरूरी विशेष बहुमत मिल पाएगा और क्या महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का रास्ता साफ होगा?इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सरकार के फैसलों और राजनीतिक दलों के बीच बातचीत से स्पष्ट हो सकते हैं। फिलहाल विशेष सत्र की संभावना पर चर्चा जारी है, लेकिन आधिकारिक कार्यक्रम घोषित होने तक इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। 

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