'ये मेरा अधिकार है....' संसद में फिर बढ़ा सियासी पारा, जानिए किस बात पर भिड़े रिजिजू और मल्लिकार्जुन खरगे
संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के नेताओं के बीच अक्सर टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसा ही एक नज़ारा गुरुवार, 6 अगस्त को राज्यसभा में देखने को मिला, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बहस हो गई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन सरकार इससे बच रही है। हंगामे के बीच, विपक्षी सांसदों ने मांग की कि विपक्ष के नेता को बोलने का मौका दिया जाए। इस पर किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि खड़गे यह तय नहीं कर सकते कि सदन में कौन सा मंत्री मौजूद रहेगा।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे की बात का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के नेता (LoP) यह तय नहीं कर सकते कि सदन में बयान देने के लिए कौन सा मंत्री आएगा। सदन में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयान देने की खड़गे की मांग पर रिजिजू ने कहा, "विपक्ष के नेता यह तय नहीं कर सकते कि कौन सा मंत्री मौजूद रहेगा; वे केवल पीठासीन अधिकारी से अनुरोध कर सकते हैं।"
**किरेन रिजिजू के बारे में खड़गे ने क्या कहा**
रिजिजू की प्रतिक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि क्या और कब कहना है, यह तय करना उनका अधिकार है और कोई दूसरा इसे तय नहीं कर सकता। खड़गे ने आगे कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कई नियमों का ज़िक्र किया, लेकिन उन्होंने नियम 238A को नज़रअंदाज़ कर दिया। उन्होंने बताया कि यह नियम संसद के किसी सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य या लोकसभा सदस्य पर लगाए गए आरोपों से संबंधित है।
**प्रधानमंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए - खड़गे**
रिजिजू को जवाब देते हुए खड़गे ने फिर कहा कि क्या, कब और कैसे बोलना है, यह तय करना उनका अधिकार है। खड़गे ने मोदी सरकार पर सदन में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का नाम लेकर उनका अपमान करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, "हमने केवल वाजिब सवाल उठाए हैं। हम गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से सदन में आकर बयान देने के लिए कह रहे हैं।"

