Hormuz Crisis: समुद्री रास्ते के संकट के बीच भारत की Energy Security पर फोकस, जानिए क्या है अंडरसी पाइपलाइन प्लान
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वैकल्पिक रास्तों पर चर्चा तेज हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल और गैस की जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है, ऐसे में समुद्री आपूर्ति मार्गों में किसी तरह का व्यवधान चिंता का विषय बन सकता है।
हालांकि, Middle East-India Deepwater Pipeline (MEIDP) को लेकर एक जरूरी स्थिति स्पष्ट है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जून 2026 में कहा था कि उस समय सरकार के स्तर पर गुजरात को ओमान और अन्य खाड़ी देशों से जोड़ने वाली ऐसी किसी डीप-सी पाइपलाइन परियोजना पर कोई सक्रिय प्रस्ताव या बातचीत नहीं चल रही थी।
क्या है MEIDP का पुराना प्रस्ताव?
MEIDP एक प्रस्तावित अंडरसी गैस पाइपलाइन परियोजना रही है, जिसे खाड़ी क्षेत्र से सीधे भारत तक प्राकृतिक गैस पहुंचाने के विकल्प के तौर पर लंबे समय से चर्चा में रखा गया है। पुराने प्रस्तावों में पाइपलाइन को अरब सागर के नीचे से भारत के पश्चिमी तट तक लाने की योजना बताई गई थी।
इस परियोजना से जुड़ी चर्चाओं में South Asia Gas Enterprise (SAGE) का नाम भी सामने आया है। पुराने तकनीकी आकलनों में समुद्र के कुछ हिस्सों में करीब 3,450 मीटर तक की गहराई पर पाइपलाइन बिछाने की चुनौती का उल्लेख किया गया था।
होर्मुज संकट ने क्यों बढ़ाई वैकल्पिक रास्तों की जरूरत?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। मार्च 2026 में सरकार ने संसद में बताया था कि संकट के दौरान इस मार्ग से वाणिज्यिक आवाजाही प्रभावित हुई थी। सरकार के अनुसार, उस समय भारत ने गैर-होर्मुज स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाकर आयात को विविध बनाने पर जोर दिया।
सरकार ने यह भी बताया था कि भारत विभिन्न देशों से कच्चे तेल की खरीद करता है, जिससे किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
अंडरसी पाइपलाइन में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती
अगर भविष्य में इस तरह की परियोजना पर काम आगे बढ़ता है, तो समुद्र की अत्यधिक गहराई सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक होगी। हजारों मीटर नीचे पाइपलाइन बिछाने के लिए समुद्री दबाव, समुद्र तल की भौगोलिक स्थिति, पाइपलाइन की सुरक्षा और लंबे समय में रखरखाव जैसी चीजों का ध्यान रखना होगा।
पुराने तकनीकी आकलनों में करीब 3,450 मीटर की गहराई तक पाइपलाइन बिछाने की संभावना का उल्लेख किया गया था।
भारत ने ऊर्जा आपूर्ति के लिए दूसरे विकल्प भी बढ़ाए
होर्मुज संकट के दौरान भारत सरकार ने तेल, गैस और LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई उपाय किए। मार्च 2026 में पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया था कि देश की रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही थीं और पेट्रोल-डीजल की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी कहा गया था कि भारत तेल और गैस की आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न स्रोतों और रास्तों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।
इसलिए फिलहाल MEIDP को भविष्य के संभावित ऊर्जा विकल्प के रूप में देखना ज्यादा सही है, न कि ऐसी परियोजना के रूप में जिसे केंद्र सरकार ने मौजूदा समय में मंजूरी देकर निर्माण शुरू कर दिया हो।

