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प्रदर्शन के दौरान हिरासत में पूर्व मुख्यमंत्री! ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन पर पुलिस का बड़ा एक्शन, सियासत गरमाई

प्रदर्शन के दौरान हिरासत में पूर्व मुख्यमंत्री! ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन पर पुलिस का बड़ा एक्शन, सियासत गरमाई

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच राजनीतिक माहौल गरमा गया है। प्रदर्शन के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केरल के वरिष्ठ वामपंथी नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

ममता बनर्जी को दिल्ली के साउथ एवेन्यू इलाके में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ हिरासत में लिया गया। वहीं, अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं।

पी. विजयन ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान माकपा के वरिष्ठ नेता पी. विजयन समेत कई नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद विजयन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर NDA सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली को एक तरह की ‘ओपन जेल’ में बदल दिया गया है और भारी पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती के जरिए लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है।

विजयन ने कहा कि मतदाता का वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।

दिल्ली से केरल तक सड़कों पर उतरे माकपा कार्यकर्ता

दिल्ली में पार्टी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद केरल के अलग-अलग हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। माकपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ मार्च निकाले और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की।

रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, माकपा महासचिव एम. ए. बेबी और राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली में केरल हाउस के पास हिरासत में लिया गया। ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए बाहर आए थे।

कोझिकोड में बेपोर के विधायक पी. ए. मोहम्मद रियास के नेतृत्व में माकपा कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। रियास ने कहा कि दिल्ली में पार्टी नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों और विरोध के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा।

कन्नूर में माकपा के जिला सचिव के. के. रागेश ने प्रदर्शन मार्च का नेतृत्व किया। राज्य के अन्य हिस्सों में भी पार्टी की जिला समितियों ने विरोध कार्यक्रम आयोजित किए।

पलक्कड़ में प्रदर्शन के दौरान तनाव, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल

केरल के पलक्कड़ में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के प्रदर्शन के दौरान तनाव और हिंसा की खबर सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।

राज्य में आगे भी विरोध मार्च आयोजित किए जाने की आशंका को देखते हुए पुलिस सतर्क है। दिल्ली में हुई कार्रवाई का असर अब दूसरे राज्यों की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है।

प्रियंका गांधी बोलीं—देश में लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है और सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि पहले 254 सांसदों के साथ मारपीट की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया। प्रियंका गांधी के मुताबिक, दिल्ली में बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग की गई, कई स्थानों पर आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए और मेट्रो, रेल तथा इंटरनेट सेवाओं को लेकर भी पाबंदियों की खबरें सामने आईं।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष का विस्तृत जवाब और प्रत्येक प्रतिबंध की आधिकारिक स्थिति अलग से देखना जरूरी है।

SIR और चुनाव आयोग को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और विपक्षी नेताओं की हिरासत ने चुनावी प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।फिलहाल, दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और गर्मा सकता है।

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