SIR वाले राज्यों के लिए चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: वोटर फॉर्म-6 में हुआ बदलाव, 5 पॉइंट्स में समझें पूरी खबर
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या दोबारा शामिल कराने वालों के लिए चुनाव आयोग ने Form 6 को लेकर बड़ा बदलाव किया है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ऑनलाइन Form 6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई है।
यह बदलाव मंगलवार देर रात ECINET पोर्टल पर किया गया। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को ही साफ किया था कि SIR की अवधि खत्म होने के बाद Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित Form 6 का इस्तेमाल किया जाएगा।हालांकि, जिन राज्यों में SIR अभी चल रहा है, वहां Form 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी फिलहाल दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ा बदलाव क्या हुआ?
SIR के दौरान Form 6 में एक अतिरिक्त घोषणा के जरिए आवेदक से पुराने वोटर रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही थी। इसमें परिवार के सदस्यों के पिछले SIR के दौरान मतदाता सूची में दर्ज होने जैसी जानकारी शामिल थी।अब जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां यह अतिरिक्त हिस्सा हटा दिया गया है। यानी वहां नया वोटर या दोबारा नाम जुड़वाने वाला व्यक्ति सामान्य Form 6 के जरिए आवेदन कर सकेगा।
क्या SIR में नाम कटने वालों को अब बिना जांच के वोटर लिस्ट में जोड़ा जाएगा?
ऐसा नहीं है।
अतिरिक्त घोषणा हटाने का मतलब यह नहीं है कि वोटर का वेरिफिकेशन खत्म हो गया है। Form 6 के तहत नाम जोड़ने की सामान्य प्रक्रिया और मतदाता बनने की पात्रता की जांच जारी रहेगी।
यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान छूट गया है, वे लगातार अपडेट की प्रक्रिया के तहत Form 6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि SIR के बाद छूटे लोगों और नए मतदाताओं के लिए continuous updation के जरिए आवेदन किया जा सकता है।
पहली बार वोटर बनने वालों को क्या फायदा?
पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटने के बाद उन्हें उस अतिरिक्त हिस्से में पुराने वोटर रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भरने की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, Form 6 में मांगी जाने वाली सामान्य जानकारी और पात्रता से जुड़े नियम लागू रहेंगे।
क्या 2003 की वोटर लिस्ट अब बेकार हो जाएगी?
नहीं।
पुरानी वोटर लिस्ट SIR से जुड़ी जांच और रिकॉर्ड मिलान में इस्तेमाल हो सकती है। बदलाव सिर्फ इतना है कि SIR पूरा होने वाले राज्यों में Form 6 के साथ SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा नहीं मांगी जाएगी।
इस बदलाव की पृष्ठभूमि क्या है?
Form 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जोड़े जाने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे थे। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, उनका सवाल था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए नियमों में संशोधन की जरूरत हो सकती है।
इसके बाद 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला भी किया। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त करेंगे और इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा।
अब वोटर्स के लिए सीधी बात
अगर आपके राज्य में SIR पूरा हो चुका है और आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो Form 6 के जरिए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया जा सकता हैवहीं, अगर आपके राज्य में SIR अभी जारी है, तो Form 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी दिखाई दे सकती है।यानी SIR पूरा होने के बाद Form 6 सामान्य वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार चलेगा, जबकि SIR वाले राज्यों में संबंधित अतिरिक्त प्रक्रिया जारी रह सकती है।

