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Election Commission SIR: वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाने पर EC में मतभेद, दो आयुक्तों ने जताई आपत्ति
 

Election Commission SIR: वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाने पर EC में मतभेद, दो आयुक्तों ने जताई आपत्ति

भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर आयोग के भीतर मतभेद सामने आए हैं. The Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है. 


रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों या आदेशों को लेकर आपत्ति दर्ज की. यह विवाद मुख्य रूप से SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और डेटा से जुड़े फैसलों को लेकर बताया गया है. (
30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का असर
SIR प्रक्रिया के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं. यह संख्या ड्राफ्ट स्तर पर हुए बदलावों को दर्शाती है और अंतिम मतदाता सूची में इसमें बदलाव हो सकता है, क्योंकि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के बाद नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं. 
इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट जैसे मामलों की पहचान करना है. हालांकि, बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के कारण इसकी प्रक्रिया और सत्यापन को लेकर सार्वजनिक बहस भी जारी है.


दो चुनाव आयुक्तों ने किन मुद्दों पर सवाल उठाए?
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने कुछ मामलों में आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया, मतदाता डेटा तक पहुंच और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने से जुड़े कदमों पर सवाल उठाए. रिपोर्ट में दोनों आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है और बताया गया है कि उन्होंने कुछ कार्रवाइयों को अपने अनुसार अनधिकृत या नियमों के अनुरूप नहीं बताया. 
रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता डेटाबेस को दिल्ली में केंद्रीकृत करने और राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका से जुड़े मुद्दे भी इन आपत्तियों में शामिल रहे.
ड्राफ्ट लिस्ट के बाद क्या होता है?
मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी होने के बाद प्रभावित मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है. अगर किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से ड्राफ्ट सूची से हट गया है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है.
हाल के मामलों में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी है. उदाहरण के तौर पर, पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की है, ऐसा चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है. 
SIR को लेकर अदालतों में भी मामले
मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर अदालतों में भी कई मामले चल रहे हैं. दिल्ली में SIR से जुड़े नोटिस और उनके आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है. कोर्ट के समक्ष नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और मतदाताओं को जवाब देने के अवसर से जुड़े मुद्दे भी उठे हैं. 
इस बीच, चुनाव आयोग की आंतरिक आपत्तियों और SIR के अगले चरणों पर नजर बनी हुई है. अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम बहाल होते हैं और कितने बदलाव कायम रहते हैं, यह दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा.
 

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