Election Commission Row: SIR को लेकर घमासान, राहुल गांधी ने मांगा CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा; आज कांग्रेस का मार्च
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में राज्य और जिला स्तर पर चुनाव आयोग के कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है।
विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट के बाद तेज हुई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, चुनावी डेटाबेस और SIR से जुड़े कई मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
राहुल गांधी ने CEC से इस्तीफा मांगा
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए और SIR से जुड़ी रिपोर्ट को अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया।
कांग्रेस ने इसके बाद अपने प्रदेश संगठनों और जिला कांग्रेस समितियों को चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का निर्देश दिया है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर विवाद
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े IT सिस्टम सहित कई मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं में अपनी जानकारी या सहमति के बिना फैसले लिए जाने पर सवाल उठाए थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों पर अलग रुख रखते हुए कहा है कि अलग-अलग चरणों में अधिकारियों के बीच सुझाव या टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR से जुडेो प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
CEC का मेरठ कार्यक्रम स्थगित
CEC ज्ञानेश कुमार का मेरठ में प्रस्तावित कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया जा चुका था और इसका मौजूदा विवाद से संबंध नहीं है।
विपक्ष की ओर से कई कदम
कांग्रेस के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों की ओर से CEC को हटाने की मांग के साथ संसदीय प्रक्रिया के जरिए कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा की जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
BJP ने आरोपों पर क्या कहा?
विपक्ष के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि महत्वपूर्ण फैसले बहुमत के आधार पर किए गए।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने भी अपने स्तर पर आंतरिक मतभेद या फैसलों में किसी तरह की असहमति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
अब SIR और चुनाव आयोग पर नजर
SIR को लेकर विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कई राज्यों में राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज की गई आपत्तियों, विपक्ष के आरोपों और आयोग की सफाई—तीनों के बीच स्थिति पर आगे भी राजनीतिक और न्यायिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

