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Delhi Slap Case: मंत्री पर थप्पड़ मारने का आरोप, जानें आम नागरिक से मारपीट पर BNS में क्या है सजा
 

Delhi Slap Case: मंत्री पर थप्पड़ मारने का आरोप, जानें आम नागरिक से मारपीट पर BNS में क्या है सजा


दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान PWD मंत्री प्रवेश वर्मा से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। वीडियो में मंत्री सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल पूछ रहे एक युवक साहिब सिंह के साथ हाथापाई करते नजर आ रहे हैं। युवक का आरोप है कि पहले उसका मोबाइल फोन लिया गया और इसके बाद उसे थप्पड़ मारा गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसके साथ धक्का-मुक्की की।
मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है। विवाद के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी आम नागरिक के साथ मारपीट करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) में क्या कानूनी प्रावधान हैं और क्या किसी मंत्री या जनप्रतिनिधि को ऐसी कार्रवाई से कोई विशेष छूट मिलती है।
BNS में चोट पहुंचाने पर क्या है प्रावधान?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से जुड़े मामलों में लागू हो सकती है। इस प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल, 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
हालांकि, किसी मामले में कौन-सी धारा लागू होगी, यह घटना की परिस्थितियों, चोट की प्रकृति और जांच में सामने आए तथ्यों पर निर्भर करता है। यदि मारपीट के कारण गंभीर चोट आती है, जैसे हड्डी टूटना या गंभीर शारीरिक क्षति, तो अधिक गंभीर कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं और सजा भी बढ़ सकती है।
क्या मंत्री या सांसद को कानून से कोई विशेष छूट है?
सिर्फ मंत्री, विधायक या सांसद होने से किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर मारपीट करने के मामले में आपराधिक कानून से सामान्य छूट नहीं मिलती। सार्वजनिक स्थान पर किसी नागरिक के साथ कथित मारपीट की स्थिति में संबंधित व्यक्ति पर सामान्य आपराधिक कानून के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
वहीं, संविधान के तहत संसद और विधानसभाओं के भीतर सदस्यों को कुछ विशेषाधिकार हासिल हैं। ये विशेषाधिकार सार्वजनिक स्थान पर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट करने की स्थिति में सामान्य आपराधिक कानून से blanket immunity नहीं देते।


सुरक्षाकर्मियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी सुरक्षाकर्मी या अन्य व्यक्ति ने भी पीड़ित के साथ धक्का-मुक्की या मारपीट की, तो उसकी भूमिका के आधार पर उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
तिलक नगर मामले में सुरक्षाकर्मियों द्वारा युवक को हटाने के दौरान धक्का देने का आरोप लगाया गया है। इस आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के बाद तय होगी कानूनी कार्रवाई
इस पूरे मामले में फिलहाल आरोप और सामने आए वीडियो को जांच के संदर्भ में देखा जा रहा है। पुलिस की जांच में घटना की पूरी परिस्थितियां, वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कथित चोटों से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और लागू होने वाली धाराएं तय होंगी।
 

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