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Delhi Protest: 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले हिरासत में लेने के आरोप, होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच कर रही पुलिस
 

Delhi Protest: 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले हिरासत में लेने के आरोप, होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच कर रही पुलिस

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में समर्थकों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के आरोप सामने आए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी छात्र संगठनों ने दावा किया है कि दिल्ली जाने वाले कुछ युवाओं को रास्ते में रोका गया और पुलिस कार्यकर्ताओं के घरों पर जाकर उनके परिवारों से पूछताछ कर रही है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस होटलों और गेस्ट हाउसों में ठहरे लोगों के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। हालांकि, हिरासत में लिए जाने और परिवारों को डराने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।
CJP का दावा- दिल्ली जाते समय युवाओं को हिरासत में लिया
CJP ने आरोप लगाया कि पुणे से दिल्ली जा रहे कुछ छात्रों को रास्ते में हिरासत में लिया गया। संगठन के मुताबिक, युवाओं को बस से उतारकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
संगठन ने मध्य प्रदेश का एक वीडियो भी साझा किया है। इसमें चलती बस में कुछ युवाओं को देखा जा सकता है। CJP के दावे के अनुसार, वीडियो में मौजूद एक युवक ने मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात कही।
CJP ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर उनके परिजनों से पूछताछ की जा रही है और उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
SFI ने भी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का आरोप लगाया
वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने दावा किया कि उसके और अन्य लोकतांत्रिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि पुलिस कार्यकर्ताओं के घरों पर पहुंच रही है और उनके परिवारों पर दबाव बना रही है।
SFI के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में सहारनपुर का उसका जिला संयोजक आरिफ भी शामिल है। ऑल इंडिया किसान सभा के नेता दाऊद राव को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन सभी मामलों में हिरासत की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
दिल्ली में होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच
प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस होटलों और गेस्ट हाउसों में ठहरे लोगों की जानकारी की जांच कर रही है। अधिकारियों के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस को ठहरने वाले लोगों के रिकॉर्ड की पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
•    होटल रजिस्टर और पहचान पत्र: मेहमानों की पहचान और रजिस्टर में दर्ज विवरण का मिलान किया जा रहा है।
•    8 से 11 अक्टूबर के रिकॉर्ड: इस अवधि में ठहरने वाले लोगों की जानकारी की जांच की जा रही है।
•    समूह में आए लोगों से पूछताछ: एक साथ दिल्ली पहुंचे युवाओं से उनके आने के उद्देश्य के बारे में पूछा जा सकता है।
•    बुकिंग और वास्तविक मेहमान की जानकारी: कमरा बुक कराने वाले व्यक्ति और उसमें ठहरने वाले व्यक्ति के विवरण का मिलान किया जा रहा है।
•    बसों और परिवहन पर निगरानी: दिल्ली की ओर आने वाले समूहों की यात्रा और बस बुकिंग पर नजर रखे जाने की जानकारी दी गई है।
•    रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के आसपास निगरानी: बड़े समूहों में आने वाले यात्रियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इन जांचों को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने पर कार्रवाई का दायरा और उद्देश्य स्पष्ट हो सकेगा।
अभिजीत दीपके ने हिरासत के दावों पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रदर्शन से पहले लोगों को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
दीपके ने दावा किया कि लोगों को हिरासत में लेकर विरोध की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाई से प्रदर्शन में शामिल होने का लोगों का संकल्प कमजोर नहीं होगा।
ये बयान प्रदर्शन के आयोजकों और समर्थकों के आरोपों को दर्शाते हैं। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और पुलिस कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। संगठन की ओर से पहले भी सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थकों से दिल्ली पहुंचने की अपील की गई थी।
अभिजीत दीपके ने कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर ही विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा।
प्रदर्शन को लेकर पुलिस की तैयारियों और आयोजकों के दावों के बीच अब सबकी नजर 10 अक्टूबर की स्थिति पर है।
SIR के फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का दावा
इस पूरे विवाद के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने की खबर भी चर्चा में है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे। बताया गया कि इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।
रिपोर्ट में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ-साथ चुनावी डेटा और उसे संभालने वाले सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख है। Form-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े जाने और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मामलों पर भी आपत्ति जताए जाने की बात कही गई है।
इसके अलावा, रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से संबंधित चिंताओं को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। काम के बंटवारे से जुड़े एक आदेश पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे।
प्रदर्शन से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने के आरोप, पुलिस की जांच और SIR को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने मामले को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल, CJP और SFI के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। वहीं, चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़े दावों को समझने के लिए संबंधित रिपोर्ट और आधिकारिक दस्तावेजों का पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।
 

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