Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे ने खोली MCD की पोल? 28 लाख इमारतों के सर्वे में सिर्फ 19 मिली थीं खतरनाक
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे में कम से कम सात लोगों की जान चली गई, जिनमें पांच छात्र बताए जा रहे हैं. जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां छात्रों के लिए पीजी संचालित किया जा रहा था.
घटना के बाद दिल्ली नगर निगम की ओर से की जाने वाली इमारतों की सुरक्षा जांच भी सवालों के घेरे में है. खास बात यह है कि इसी साल मानसून से पहले दिल्ली में लाखों इमारतों का सर्वे किया गया था, लेकिन उनमें से बेहद कम इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया.
जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां चलता था PG
सत्य निकेतन की संकरी गली में स्थित यह इमारत छात्रों के रहने के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी. हादसे के वक्त यहां दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कई छात्र रह रहे थे.
MCD के मुताबिक, यह संपत्ति पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी. अधिकारियों के अनुसार, इलाके में शुरुआती तौर पर केवल ग्राउंड फ्लोर और एक अतिरिक्त मंजिल के निर्माण की अनुमति थी. इसके बावजूद हादसे वाली इमारत पांच मंजिला थी.
इमारत के निर्माण की वास्तविक उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं. नगर निगम के रिकॉर्ड इसे 1990 के दशक का निर्माण बताते हैं, जबकि कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत इससे भी पुरानी थी.
इमारत का स्वीकृत नक्शा नहीं था
MCD के अनुसार, हादसे वाली इमारत का कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं था. अधिकारियों ने यह भी बताया कि इमारत को लेकर पहले कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी.
अब जांच का मुख्य सवाल यही है कि जब निर्माण निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक था, तो यह इमारत इतने वर्षों तक निगरानी से कैसे बची रही.
MCD आयुक्त संजीव खिरवार के अनुसार, इमारत गिरने के तत्काल कारणों की तस्वीर मजिस्ट्रेट जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी. बेसमेंट में किसी तरह का निर्माण या अन्य काम चल रहा था या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी.
आसपास की इमारतों पर भी कार्रवाई
हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए. एक नजदीकी इमारत को खाली कराकर सील किया गया, जहां लड़कियों का पीजी संचालित हो रहा था.
इसके अलावा आसपास की कम से कम चार इमारतों को खाली करने के नोटिस जारी किए गए. अधिकारियों ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है.
इस कदम का उद्देश्य किसी दूसरी संभावित दुर्घटना को रोकना है, क्योंकि हादसे के बाद आसपास की संरचनाओं की मजबूती को लेकर भी आशंका पैदा हो गई थी.
28 लाख इमारतों के सर्वे में सिर्फ 19 को बताया गया खतरनाक
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के भवन सुरक्षा सर्वे पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस साल करीब 27.84 लाख इमारतों का सर्वे किया गया था.
इनमें से केवल 19 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया.
हालांकि, इसी अवधि में नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी संख्या में कार्रवाई का दावा किया. जून से सितंबर के बीच करीब 980 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई हुई और लगभग 460 संपत्तियों को सील किया गया. इसके अलावा अवैध निर्माण को लेकर 1,500 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ बाहर से की गई जांच किसी इमारत की वास्तविक संरचनात्मक कमजोरी का पता लगाने के लिए पर्याप्त है?
MCD की जांच कितनी प्रभावी?
अधिकारियों के अनुसार, भवनों के सर्वे के दौरान मुख्य रूप से बाहर से दिखाई देने वाली दरारों, झुकी दीवारों और अन्य स्पष्ट कमजोरियों को देखा जाता है.
आमतौर पर यह प्रक्रिया विस्तृत स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं होती. यानी इमारत की नींव, अंदरूनी ढांचे और निर्माण सामग्री की गहराई से जांच हर मामले में नहीं की जाती.
सत्य निकेतन जैसी घटना के बाद अब इस प्रक्रिया को और व्यापक बनाने की मांग उठ सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां पुरानी इमारतों में अतिरिक्त मंजिलें बना दी गई हैं या उनका इस्तेमाल पीजी और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है.
दक्षिण दिल्ली में पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
सत्य निकेतन की घटना राजधानी में इमारतों से जुड़े हादसों की लंबी सूची में एक और गंभीर मामला बन गई है.
इस साल सैदुल अजायब में इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी. इसके कुछ ही समय बाद हौज रानी इलाके में एक बेड एंड ब्रेकफास्ट में आग लगने से 23 लोगों की जान चली गई थी.
इसके अलावा मलका गंज के सब्जी मंडी इलाके और करावल नगर में भी इमारत ढहने की घटनाएं सामने आई थीं.
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने दिल्ली के पुराने और अनधिकृत निर्माण वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
हादसे के बाद MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को निलंबित कर दिया. यह कार्रवाई आगे की अनुशासनात्मक जांच लंबित रहने तक की गई है.
इस कार्रवाई के बाद निगम की जिम्मेदारी और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है.
BJP नेता विजय गोयल ने उठाए सवाल
बीजेपी नेता विजय गोयल ने दिल्ली में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों को लेकर चिंता जताई. उनका कहना है कि राजधानी में कई इलाकों में अभी भी नियमों का उल्लंघन कर बहुमंजिला निर्माण हो रहा है.
उन्होंने पुराने दिल्ली और चांदनी चौक जैसे इलाकों में कथित अवैध निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई पुरानी इमारतें पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं और अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गंभीर हादसे हो सकते हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?
सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर किसी इमारत को निर्धारित मंजिलों से अधिक बनाया गया था, तो इसकी निगरानी किस स्तर पर हुई? अगर इमारत वर्षों से पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी, तो सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई? और मानसून से पहले हुए सर्वे में ऐसी इमारतें चिन्हित क्यों नहीं हो पाईं?
इन सवालों के जवाब मजिस्ट्रेट जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे. लेकिन इतना जरूर है कि सात लोगों की मौत ने दिल्ली में पुराने और अनधिकृत निर्माण की समस्या को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है.
नोट: हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे.

