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कर्नाटक विधानसभा में वंदे मातरम पर विवाद: कांग्रेस सरकार ने रोकी रिकॉर्डिंग तो BJP विधायकों ने पूरा गाया राष्ट्रगीत

कर्नाटक विधानसभा में वंदे मातरम पर विवाद: कांग्रेस सरकार ने रोकी रिकॉर्डिंग तो BJP विधायकों ने पूरा गाया राष्ट्रगीत

कर्नाटक विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत सोमवार को ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद के साथ हुई। विधानसभा में राष्ट्रगीत की रिकॉर्डिंग दो पैरा के बाद रोक दी गई। इसके बाद भाजपा विधायकों ने विरोध जताया और बचे हुए चार पैरा खुद गाए।विधान परिषद में भी भाजपा सदस्यों ने पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस घटनाक्रम के बाद सदन में कुछ समय के लिए सियासी माहौल गर्म हो गया।

दो पैरा के बाद क्यों रोक दी गई रिकॉर्डिंग?

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पैरा गाने का निर्देश दिया है। इसी व्यवस्था के तहत विधानसभा और विधान परिषद में भी रिकॉर्डिंग दो पैरा के बाद रोक दी गई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के इस फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती भी दी गई है। याचिका में केंद्र के जुलाई के निर्देश का हवाला देते हुए राज्य के आदेश पर सवाल उठाए गए हैं।

भाजपा विधायकों ने बाकी चार पैरा खुद गाए

विधानसभा में रिकॉर्डिंग बंद होने के बाद भाजपा विधायकों ने अपना विरोध दर्ज कराया और ‘वंदे मातरम’ के बाकी चार पैरा खुद गाने शुरू कर दिए।

इसी दौरान विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन भाजपा विधायक गीत गाते रहे।

विधान परिषद में भी भाजपा सदस्यों ने पूरा गीत गाया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

सरकार ने दो पैरा का फैसला क्यों लिया?

कर्नाटक सरकार के निर्देश के मुताबिक सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पैरा गाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के लिए यह व्यवस्था अलग रखी गई है।

यही आदेश विधानसभा में लागू किए जाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद देखने को मिला।

केंद्र के निर्देश से जुड़ा है विवाद

जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर सरकारी कार्यक्रमों के संबंध में निर्देश जारी किए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार के दो-पैरा वाले निर्देश को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस शुरू हुई।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कर्नाटक सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में केंद्र के 9 जुलाई के निर्देश का भी उल्लेख किया गया है।

2026 में वंदे मातरम को मिला कानूनी संरक्षण

इस पूरे विवाद के बीच 2026 में हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव को समझना भी जरूरी है।

केंद्र ने Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन किया है। संशोधन के जरिए ‘वंदे मातरम’ को भी उस कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है, जो पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त था।

कानून के तहत किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकना या उसे गा रही सभा में व्यवधान डालना दंडनीय बनाया गया है। ऐसे अपराध के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। दोबारा दोषसिद्धि होने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान भी कानून में है।

खास बात: दो पैरा गाना और गीत रोकना एक ही बात नहीं

यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। कर्नाटक सरकार का निर्देश सरकारी कार्यक्रमों में पहले दो पैरा गाने से संबंधित है, जबकि 2026 के केंद्रीय कानून में जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने या गायन कर रही सभा में व्यवधान डालने को दंडनीय बनाया गया है।

इसी वजह से कर्नाटक में दो पैरा के बाद रिकॉर्डिंग रोकने का मामला अब सिर्फ सदन के अंदर हुए विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है।

विशेष सत्र में और भी मुद्दों पर चर्चा

कर्नाटक विधानसभा का यह तीन दिवसीय विशेष सत्र केवल ‘वंदे मातरम’ विवाद के लिए नहीं बुलाया गया है। सरकार ने राज्य में सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया है।

अब देखना होगा कि अगले दो दिनों में सदन की कार्यवाही इन मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ती है और ‘वंदे मातरम’ को लेकर उठा विवाद कितना आगे जाता है।

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