Congress का बड़ा दावा बनाम सेना का करारा जवाब: अरुणाचल घुसपैठ के वीडियो का पूरा सच, जानें क्या है फर्जी फुटेज का मामला!
अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की कथित घुसपैठ को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने दावा किया है कि अपर सुबनसिरी जिले में चीनी सैनिक भारतीय सीमा के 40 से 50 किलोमीटर अंदर तक आ गए हैं। उन्होंने कहा कि सीमा के कई इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही और भारतीय सैनिकों की गश्त प्रभावित हो रही है।
सिरम ने स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए जुलाई के आखिरी सप्ताह में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हाथापाई और लाठी चलने की घटनाएं होने का भी दावा किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर, भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो को फर्जी और भ्रामक बताया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर चीन के कब्जे का दावा किया जा रहा है। सेना के मुताबिक, यह वीडियो अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के फुटेज के साथ छेड़छाड़ करके तैयार किया गया है।
सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर कांग्रेस ने उठाए सवाल
बोसिराम सिरम के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 से 29 अगस्त तक अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री तांगा बयालिंग के साथ अपर सुबनसिरी के सांसद जारोडुम क्री भी शामिल थे।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ईटानगर से नाचो होते हुए लाइमकिंग और तक्षिंग तक पहुंचा। इस दौरान सदस्यों ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और सीमा के आसपास की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई।
दौरे के बाद सिरम ने दावा किया कि स्थानीय लोगों को उन इलाकों में जाने में परेशानी हो रही है, जहां वे पहले याक चराने, जंगलों से जरूरी चीजें जुटाने और शिकार जैसी गतिविधियों के लिए जाते थे। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही प्रभावित होने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने मांग की कि स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों की जांच कराई जाए।
केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
बोसिराम सिरम ने चीनी घुसपैठ के दावों को खारिज करने वाले राज्य और केंद्र सरकार के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की शिकायतों को महज अफवाह बताकर खारिज करने के बजाय वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए।
सिरम के मुताबिक, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात का समय भी मांगा था, ताकि उन्हें सीमावर्ती इलाकों से जुड़ी जानकारी दी जा सके। हालांकि, उनके दावे के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात की अनुमति नहीं मिली।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से मांग की है कि सीमा पर स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए और तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
सैनिकों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने का भी दावा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सीमावर्ती इलाकों में तैनात भारतीय सैनिकों की सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की कमी के कारण सैनिकों को अपने परिवारों से संपर्क करने में परेशानी होती है।
इसके अलावा, उन्होंने खाने-पीने और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति में दिक्कतें होने का भी आरोप लगाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों और स्थानीय निवासियों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। पार्टी का कहना है कि सीमा की वास्तविक स्थिति सामने आने से ही सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय लोगों की चिंताओं का सही आकलन किया जा सकेगा।
चीनी कब्जे का दावा करने वाला वायरल वीडियो फर्जी: भारतीय सेना
इस पूरे विवाद के बीच भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम से दावा किया जा रहा था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के असाफिला, लॉन्गजू और तक्षिंग सर्किल के कुछ इलाकों पर कब्जा कर लिया है। वीडियो में भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने की बात भी कही गई थी।
सेना ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि वायरल वीडियो 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के फुटेज को एडिट करके बनाया गया है।
सेना के मुताबिक, उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेजर जनरल गिरीश कालिया ने नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बारे में जानकारी दी थी। उस दौरान अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे या भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने का कोई बयान नहीं दिया गया था।
कुपवाड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बताया गया था?
भारतीय सेना के अनुसार, अक्टूबर 2023 में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की 10 कोशिशों को नाकाम करने, 27 आतंकियों को मार गिराने और हथियारों तथा नशीले पदार्थों की बरामदगी से संबंधित जानकारी दी गई थी।
सेना का कहना है कि इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो को काट-छांटकर इस तरह पेश किया गया, जिससे यह भ्रम पैदा हो कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है।
सेना ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में किए गए दावों को 2023 की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ना गलत है। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और उसके साथ किए जा रहे दावों की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
सीमा विवाद पर अब आगे क्या?
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ को लेकर कांग्रेस के आरोप और भारतीय सेना का वायरल वीडियो पर स्पष्टीकरण, दोनों अलग-अलग पहलू हैं। कांग्रेस ने स्थानीय लोगों की शिकायतों के आधार पर सीमा की स्थिति की जांच की मांग की है, जबकि सेना ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो में चीनी कब्जे को लेकर किया गया दावा पुराने फुटेज से छेड़छाड़ करके तैयार किया गया है।

