BREAKING Update : SIR Voter List: SIR पूरा कर चुके राज्यों में फिर चलेगा विशेष अभियान, छूटे नाम और नए वोटरों पर फोकस
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग अब मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है। इस अभियान के दौरान उन पात्र लोगों के नाम दोबारा जांचे जाएंगे, जो SIR के दौरान सूची में शामिल नहीं हो सके। इसके साथ ही 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं को भी वोटर लिस्ट में जोड़ने पर जोर रहेगा।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को इस संबंध में राज्यों को लिखित निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई।
SIR के बाद हटे नामों की भी होगी जांच
आयोग ने अधिकारियों को SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों का मिलान करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से तो नहीं हट गया।
ऐसे मामलों में अधिकारियों को संबंधित मतदाता के घर जाकर जानकारी जुटाने और यह जांच करने को कहा गया है कि वह व्यक्ति डुप्लीकेट मतदाता नहीं है और उसकी मृत्यु भी नहीं हुई है। पात्र पाए जाने पर नाम दोबारा जोड़ने के लिए Form-6 की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के साथ राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
महाराष्ट्र में विशेष सतर्कता के निर्देश
महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया जारी रहने के बीच अधिकारियों को पात्र मतदाताओं के नाम हटाने में सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के अधिकारियों से कहा गया है कि किसी रिकॉर्ड पर फैसला लेने से पहले उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित जानकारी की पूरी जांच की जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस पाने वाले लोगों की सहायता के लिए अक्टूबर में विशेष कैंप आयोजित किए जाने की भी योजना है। इन कैंपों में मतदाता अपने दस्तावेज और दावे से संबंधित जानकारी अधिकारियों के सामने रख सकेंगे।
BLO घर जाकर ले सकेंगे दस्तावेज
जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें हर मामले में कार्यालय जाकर दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। BLO उनके घर जाकर जरूरी कागजात ले सकते हैं और उन्हें ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड कर सकते हैं।
इसके बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) दस्तावेजों की जांच करेंगे। यदि उपलब्ध जानकारी से मामला स्पष्ट नहीं होता है तो मतदाता को अतिरिक्त दस्तावेज देने का अवसर दिया जाएगा। नाम हटाने का फैसला जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।
ECINet की समीक्षा के लिए कमेटी
चुनाव आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का भी फैसला किया है। इसमें IIT या IIIT से जुड़े एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किए जाने की बात कही गई है। जरूरत के अनुसार सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जाएंगे।
ECINET चुनावी प्रक्रियाओं के लिए चुनाव आयोग का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे 2026 में चुनावी कार्यों और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है।
Form-6 को लेकर आयोग में भी उठे सवाल
एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और SIR से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने बाद में इन मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि SIR से संबंधित फैसले आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए गए थे। इसलिए इस पूरे मामले में आयोग के निर्देशों और रिपोर्ट में सामने आए आपत्तियों—दोनों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
नए मतदाताओं के नाम जोड़ने पर भी जोर
SIR के बाद होने वाले विशेष अभियान का एक अहम हिस्सा नए मतदाताओं का पंजीकरण भी होगा। जो युवा 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके हैं और मतदान के लिए पात्र हैं, वे Form-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
इस तरह आयोग का फोकस एक तरफ SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं की पहचान पर है, वहीं दूसरी तरफ पहली बार वोट देने वाले युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने पर भी रहेगा।

