राहुल गांधी पर BJP का बड़ा हमला, गौरव भाटिया बोले- ‘लोकतंत्र में अराजकता के प्रतीक बन गए हैं’, सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन पर उठाए सवाल
एसआईआर (SIR) और चुनाव आयोग से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने तथा संवैधानिक व्यवस्था की अनदेखी करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे नेता को अपने आचरण में संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए।गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के लोकतंत्र में अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति और हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसके लिए कानून और निर्धारित नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
राहुल गांधी को लेकर क्या बोले गौरव भाटिया?
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद बेहद जिम्मेदारी वाला होता है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी का व्यवहार इस पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।भाटिया ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी एक तरफ संविधान की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ उसके नेता और कार्यकर्ता संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, ये आरोप बीजेपी प्रवक्ता की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
प्रदर्शन के अधिकार और संवैधानिक मर्यादाओं पर BJP ने उठाए सवाल
गौरव भाटिया ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके नाम पर किसी को भी कानून तोड़ने या निर्धारित नियमों की अनदेखी करने की छूट नहीं मिल सकती।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी सार्वजनिक स्थान, सड़क या न्यायपालिका के परिसर में बिना अनुमति भीड़ जुटाकर नारेबाजी करना उचित है? बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण, कानूनी और निर्धारित नियमों के तहत होने चाहिए।
भाटिया ने 10 और 11 तारीख को हुए कथित विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के परिसर की अपनी गरिमा है और वहां किसी भी तरह का ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव डालने का संदेश जाए।
‘क्या सुप्रीम कोर्ट में भीड़तंत्र चलेगा?’ BJP का सवाल
बीजेपी प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और उसकी स्वतंत्रता तथा गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर नारेबाजी करना न्यायिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश जैसा दिखाई दे सकता है। भाटिया ने कहा कि राजनीतिक विरोध के लिए निर्धारित स्थानों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
इस बयान के जरिए बीजेपी ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, प्रदर्शन के अधिकार और उससे जुड़ी कानूनी सीमाओं का आकलन संबंधित तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।
नेहा बोरा और अभिजीत दीपके पर भी साधा निशाना
गौरव भाटिया ने अपने बयान में सीजेपी से जुड़े अभिजीत दीपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी तिरंगे का हवाला देकर ऐसे विरोध प्रदर्शनों को उचित ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर नियमों के उल्लंघन के सवाल उठ रहे हैं।भाटिया ने नेहा बोरा के कथित बांग्लादेश संबंधी बयान को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की जगह भीड़ के दबाव की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं।उन्होंने कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि वहां प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों तथा अनुमति की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
SIR और चुनाव आयोग का मुद्दा बना राजनीतिक टकराव की वजह
एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल अब राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गए हैं। एक ओर विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर निशाना साध रही है।
गौरव भाटिया के बयान से साफ है कि बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में एसआईआर, चुनाव आयोग और विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज होने की संभावना है।कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। गौरव भाटिया ने विरोध प्रदर्शन की मर्यादा, संवैधानिक जिम्मेदारी और न्यायपालिका की गरिमा का मुद्दा उठाया। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद में लगाए गए राजनीतिक आरोपों और संबंधित घटनाओं के तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

