‘वोट चोरी’ के आरोपों पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, राहुल गांधी के बयान पर BJP का पलटवार
चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने अपने पुराने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को दोहराते हुए चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी के इन आरोपों पर बीजेपी नेताओं ने जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राहुल गांधी के दावों को गलत बताया और कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। मेघवाल ने सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयोग की प्रक्रिया सही नहीं है, तो कांग्रेस को अलग-अलग राज्यों में चुनावी सफलता कैसे मिली।
वहीं बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी की चुनावी राजनीति और विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला देते हुए उनके दावों की आलोचना की।
चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से जवाब देने को कहा
इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अलग बात कही। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग को लेकर जनता के मन में सवाल उठ रहे हैं, तो आयोग की जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे।
चिराग पासवान के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह पैदा होना उचित नहीं है और चुनाव आयोग को उठ रहे सवालों पर मजबूती से स्पष्टीकरण देना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने राहुल के आरोपों का बचाव किया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी के आरोपों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने दावों के समर्थन में तथ्य और सबूत सार्वजनिक किए हैं। प्रियंका गांधी ने वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का भी दावा किया और बीजेपी से इन आरोपों का जवाब देने को कहा।
कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल उठे हैं।
चुनाव आयोग की ओर से क्या कहा गया?
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव आयुक्तों के बीच उठाए गए मुद्दों पर आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग से जुड़े अधिकारियों के बीच मतदाता सूची और अन्य विषयों को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन आयोग का कहना है कि अंतिम फैसलों को सभी तीनों आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।
फिलहाल ‘वोट चोरी’ के आरोपों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस, बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच बयानबाजी जारी है। इस पूरे मामले में राजनीतिक दावों के साथ-साथ चुनाव आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण भी चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।

