अमित शाह ने खोला कांग्रेस के दावों का कच्चा चिट्ठा : बोले- ‘घुसपैठियों को बचाना चाहती है कांग्रेस’, हैदराबाद में निकाला ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च
केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार, 2 नवंबर को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च में शामिल हुए। बीजेपी ने इस अभियान की शुरुआत विपक्ष के SIR विरोधी आंदोलन के जवाब में की है।
इस मार्च के जरिए बीजेपी विपक्ष के वोट चोरी और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के आरोपों का जवाब दे रही है। अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष SIR का विरोध करके घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी अवैध घुसपैठियों को देश और मतदाता सूची से बाहर करने के अपने अभियान से पीछे नहीं हटेगी।
राहुल गांधी पर अमित शाह का निशाना
हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान SIR को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रही बयानबाजी फिर चर्चा में रही। अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं।शाह का कहना है कि विपक्ष करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाकर लोगों को गुमराह कर रहा है। बीजेपी की दलील है कि इन नामों में मृत, दूसरी जगह जा चुके, अनुपस्थित और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाता शामिल हैं।
बीजेपी नेताओं की ओर से इस आंकड़े का वर्गीकरण भी पेश किया गया है। उनके दावे के मुताबिक, करीब 2.8 करोड़ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, लगभग 3 करोड़ लोग सत्यापन के दौरान नहीं मिले, करीब 6.3 करोड़ लोग दूसरी जगह स्थायी रूप से चले गए और लगभग एक करोड़ नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज थे। ये आंकड़े बीजेपी नेताओं के दावे हैं; इन्हें चुनाव आयोग के स्वतंत्र रूप से सत्यापित निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
घुसपैठियों को वोट बैंक बनाना चाहती है कांग्रेस: बीजेपी
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस SIR की प्रक्रिया को रोककर बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव में वोट देने का अधिकार केवल पात्र भारतीय नागरिकों को होना चाहिए।अमित शाह पहले भी राहुल गांधी पर घुसपैठियों के वोट बचाने की कोशिश करने का आरोप लगा चुके हैं। बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। वहीं, विपक्ष इस प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका जता रहा है।
बीजेपी के देशव्यापी अभियान के पीछे ये हैं 4 बड़े कारण
बीजेपी ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान की शुरुआत 22 अक्टूबर 2026 को की थी। इसका पहला चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलाया जा रहा है। पार्टी इस दौरान अलग-अलग राज्यों में मार्च, रैलियों और जनसभाओं के जरिए अपना पक्ष रख रही है।
1. SIR के समर्थन में अभियान: बीजेपी का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना और मृत, स्थानांतरित तथा दोहरी प्रविष्टियों वाले नामों की पहचान करना है।
2. वोट चोरी के आरोपों का जवाब: राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी इन आरोपों को गलत बताते हुए जनता के बीच अपना पक्ष रखना चाहती है।
3. चुनाव आयोग का बचाव: बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष बिना पर्याप्त सबूत के चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठा रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
4. कांग्रेस और INDIA ब्लॉक को घेरना: बीजेपी विपक्ष पर चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रही है। इसी के जवाब में पार्टी देशभर में अभियान चला रही है।
दिल्ली में INDIA ब्लॉक की रैली के बाद बीजेपी का मार्च
SIR को लेकर विपक्ष ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित की थी। इसमें कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोप उठाते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
इसके जवाब में बीजेपी ने दिल्ली समेत कई जगहों पर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाला। दिल्ली में हरि नगर से तिलक नगर तक भी मार्च आयोजित किया गया। इसमें सिख समुदाय के लोगों और 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों ने हिस्सा लिया।बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने रामलीला मैदान में रैली के लिए 1 नवंबर की तारीख जानबूझकर चुनी। पार्टी नेताओं ने इस तारीख को 1984 की सिख विरोधी हिंसा की घटनाओं से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे विपक्षी नेता
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की लड़ाई अब सड़कों से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली में बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था।
इसी दिन विपक्षी दलों के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। याचिका में मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच और हटाए गए नामों का विवरण सार्वजनिक करने जैसी मांगें भी रखी गईं।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से जुड़े एक अलग मामले में भी राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया था।
SIR को लेकर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने
फिलहाल SIR को लेकर बीजेपी और INDIA ब्लॉक के बीच राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। बीजेपी इसे मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया बता रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इसके नाम पर वास्तविक मतदाताओं के वोट काटे जा सकते हैं।अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्रवाई अहम होगी। साथ ही यह देखना होगा कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित संस्थाएं क्या जवाब देती हैं।

