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CJP के अल्टीमेटम के बाद सरकार एक्शन मोड में! अब उठाने जा रही बड़ा कदम, जानिए पूरा मामला​​​​​​​

CJP के अल्टीमेटम के बाद सरकार एक्शन मोड में! अब उठाने जा रही बड़ा कदम, जानिए पूरा मामला​​​​​​​

सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शिकायत पर ध्यान दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार उन राज्यों से जानकारी इकट्ठा कर रही है जहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। CJP ने आरोप लगाया है कि कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। CJP ने सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो उन्हें फिर से विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करना होगा।

CJP के प्रवक्ता ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित एक पोस्ट में, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने सरकार पर NEET आंदोलन खत्म करने के समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों को हिरासत में लेने और दिल्ली व उत्तर प्रदेश में पुलिस की छापेमारी का हवाला दिया।

समझौते के उल्लंघन के आरोप

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने के समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है। बिहार और बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में सैकड़ों छात्रों पर नज़र रखी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों को हिरासत में लेने की खबरें भी आ रही हैं। CJP ने FIR तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए युवाओं को रिहा करने और कानूनी सुरक्षा पर लिखित समझौता मंगलवार तक देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर ये मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR वापस लेने की मांग

रंका ने कहा, "हम मांग करते हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं, छात्रों को रिहा किया जाए और हमारे समझौते के अनुसार दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों या BJP शासित राज्यों की पुलिस भविष्य में कोई FIR दर्ज न करे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम फिर से धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।" हम यह भी मांग करते हैं कि कानूनी मामलों पर लिखित समझौता कल तक हमारे साथ साझा किया जाए और भारत सरकार के साथ तय की गई समय-सीमा का पालन किया जाए।

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