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भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्य

वेदों के रचयिता वेदव्यास जी ने महाभारत महाकाव्य की रचना की हैं इस महाकाव्य में प्रमुख स्तंभ भीष्म पितामह को बताया गया हैं इनके पिता शांतनु थे, जो कि हस्तिनापुर के शासक थे। इनकी माता गंगा थी। एक बार जब शांतनु आखेट के लिए निकले तो आखेट करते करते वन में दूर निकल गए। इसके
भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्य

वेदों के रचयिता वेदव्यास जी ने महाभारत महाकाव्य की रचना की हैं इस महाकाव्य में प्रमुख स्तंभ भीष्म पितामह को बताया गया हैं इनके पिता शांतनु थे, जो कि हस्तिनापुर के शासक थे। इनकी माता गंगा थी। एक बार जब शांतनु आखेट के लिए निकले तो आखेट करते करते वन में दूर निकल गए। इसके बाद अंधेरा होने कारण वह वापस नहीं आ पाए। उस समय उन्हें वन में एक आश्रम ​दिखा।भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्य जहां उनकी मुलाकात सत्यवती नाम की एक स्त्री से हुई और दोनों मन ही मन एक दूसरे को प्रेम करने लगे। वही अगले दिन राजा शांतनु ने सत्यवती के पिता के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे सत्यवती के पिता ने स्वीकार कर लिया। सत्यवती ने एक शर्त रखी कि हस्तिनापुर का राजा उनका पुत्र होगा। इसी इच्छा पूर्ति हेतु भीष्म पितामह ने आजीवन विवाह न करने की प्रतिज्ञा ली। इस त्याग के कारण उनके पतिा ने उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्यकालांतर में राजा शांतनु की मृत्यु के बाद पांडु राजा बना। मगर पांडु की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र राजा बना। वह हमेशा चाहता था कि उसका वारिस ही ​हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी बनें। जब दुर्योधन बड़ा हुआ तो उसने पांडु के पुत्रों को पांच गांव देकर सब कुछ अपने पास रख लिया।भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्य भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्यइस द्वेष भावना के साथ साथ कई अन्य कारणों से महाभारत युद्ध हुआ। इस युद्ध में कौरव साम्राजय का पतन हो गया। महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने भीष्म पितामह को परास्त किया। उस वक्त तीरों के प्रहार से वह पूरी तरह घायल हो गए मगर भीष्म पितामह इच्छामृत्यु के कारण जीवित रहे और बाण शैया पर विश्राम करते रहे। भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान किसने दिया और क्यों वह मृत्यु शैय्या पर लेटे रहे, जानिए रहस्य

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