सूरदास जयंती 2020: जानिए भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त सूरदास के बारे में
आज यानी 28 अप्रैल दिन मंगलवार को भगवान कृष्ण के परम भक्त संत सूरदास की जयंती मनाई जा रही हैं संत सूरदास का का जन्म 1478 ई में रुनकत गांव में हुआ था। सूरदास के पिता का नाम रामदस था। सूरदास के जन्म को लेकर अलग अलग मत हैं सूरदास जन्म से ही अंधे थे।
पंचांग के मुताबिक वैशाख शुक्ल पंचमी को सूरदास जी की जयंती मनाई जाती हैं जब सूरदास की मुलाकात वल्लभाचार्य से हुई वह उनके शिष्य बन गए इसके बाद पुष्टिमार्ग की दीक्षा प्राप्त करके कृष्णलीला में रम गए। वही ऐसा भी माना जाता हैं कि सूरदास को एक बार श्रीकृष्ण के दर्शन भी मिले थे। सूरदास बचपन से ही साधु प्रवृति के थे। इन्हें गाने की कला वरदान में प्राप्त हुई थी। जल ही ये बहुत प्रसिद्ध भी हो गए थ
वही कुछ दिनों में सूरदास आगरा के पास गऊघाट पर हरने लगे यहां ये जल्द ही स्वामी के रूप में प्रसिद्ध हो गए। यही पर इनकी मुलाकात वल्लभाचार्य जी से हुई थी। उन्हें इन्हें पुष्टिमार्ग की दीक्षा दी और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का दर्शन करवाया।
वल्लभाचार्य ने इन्हें श्रीनाथ जी के मंदिर लीलागान का दायित्व सौंपा जिसे ये जीवन पर्यंत निभाते रहें हैं। श्रीकृष्ण के परम भक्त सूरदास के बारे में कृष्ण भक्ति से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं एक बार सूरदास कृष्ण की भक्ति में इतने लीन हो गए थे कि वे एक कुंए में जा गिरे, जिसके बाद भगवान कृष्ण ने खुद उनकी जान बचाई और आंखों की रोशनी वापस कर दी। जब श्री कृष्ण ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान में कुछ मांगने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि आप फिर से मुझे अंधा कर दें। मैं श्रीकृष्ण के अलावा अन्य किसी को देखना नहीं चाहता हूं। 

