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भांगड़ा गिद्दा के साथ मनाया जाता हैं बैसाखी पर्व, सिखों के लिए है बेहद खास

आपको बता दें कि आज बैसाखी का पर्व मनाया जा रहा हैं बैसाखी त्योहार मुख्य रूप से किसानों का पर्व माना जाता हैं जो उत्तर भारत के राज्यों में मनाया जाता हैं खासकर पंजाब और हरियाणा के लोग इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं मगर इस साल बैसाखी की रौनक फीकी रहने
भांगड़ा गिद्दा के साथ मनाया जाता हैं बैसाखी पर्व, सिखों के लिए है बेहद खास

आपको बता दें कि आज बैसाखी का पर्व मनाया जा रहा हैं बैसाखी त्योहार मुख्य रूप से किसानों का पर्व माना जाता हैं जो उत्तर भारत के राज्यों में मनाया जाता हैं भांगड़ा गिद्दा के साथ मनाया जाता हैं बैसाखी पर्व, सिखों के लिए है बेहद खासखासकर पंजाब और हरियाणा के लोग इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं मगर इस साल बैसाखी की रौनक फीकी रहने वाली हैं क्योंकि कोरोना वायरस के चलते पूरे देशभर में लॉक डाउन लागू हैं कृषि के अलावा यह पर्व अन्य मान्यताओं से भी जुड़ा होता हैं हर साल यह पर्व 13 या 14 अप्रैल के दिन मनाया जाता हैं इस साल बैसाखी पर्व 13 अप्रैल यानी आज मनाई जा रही हैं। भांगड़ा गिद्दा के साथ मनाया जाता हैं बैसाखी पर्व, सिखों के लिए है बेहद खासबैसाखी माह में रबी की फसल के पक कर तैयार होने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता हैं किसान अपनी फसल की कटाई के बाद इस पर्व के रूप में जश्न मनाते हैं। इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों को बैसाखी की शुभ कामनाएं देते हैं और उत्तर भारत में कई जगह मेले भी लगते हैं। भांगड़ा गिद्दा के साथ मनाया जाता हैं बैसाखी पर्व, सिखों के लिए है बेहद खासयह पर्व सिख समुदाय के लोगों के लिए बहुत ही खास होता हैं सिख समुदाय की मान्यता के मुताबिक बैसाखी पर्व उनके लिए नए साल के आगमन का त्योहार हैं कहा जाता हैं कि बैसाखी के ही दिन साल 1699 में सिखों के अंतिम गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। वही खालसा पंथ की स्थापना का उद्देश्य आम लोगों की मुगलों के अत्याचारों से रक्षा करना था। बैसाखी पर्व का ज्योतिष महत्व भी होता हैं इसदिन मेष संक्रांति होती हैं। मेष संक्रांति से आशय सूर्य का मेष राशि में प्रवेश से होता हैं।भांगड़ा गिद्दा के साथ मनाया जाता हैं बैसाखी पर्व, सिखों के लिए है बेहद खास

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