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जन्मदिन विशेष: किसी सरहद का मोहताज नहीं रहा पंडित रविशंकर प्रसाद का संगीत

जयपुर। आप जब भी सितार सुनते हैं तो जेहन में सबसे पहले जिसका नाम आता है, पंडित रविशंकर प्रसाद का। सितार को भारत से निकालकर विश्व के मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने वाले संगीत की देवी के इस मानस पुत्र को उनकी अप्रतिम प्रतिभा और विलक्षण सितार वादन के लिए जाना जाता है। आज इस संगीत
जन्मदिन विशेष: किसी सरहद का मोहताज नहीं रहा पंडित रविशंकर प्रसाद का संगीत

जयपुर। आप जब भी सितार सुनते हैं तो जेहन में सबसे पहले जिसका नाम आता है, पंडित रविशंकर प्रसाद का। सितार को भारत से निकालकर विश्व के मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने वाले संगीत की देवी के इस मानस पुत्र को उनकी अप्रतिम प्रतिभा और विलक्षण सितार वादन के लिए जाना जाता है।

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आज इस संगीत सम्राट का जन्मदिन है, रविशंकर प्रसाद का जन्म 7 अप्रैल, 1920 में वाराणसी में हुआ था। रविशंकर का हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में अमर योगदान है। उन्होंने अपनी कला से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व को भी प्रभावित किया।

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उन्होंने संगीत शिक्षा के दौरान उन्होंने ध्रुपद, धमार और ख्याल के साथ-साथ रूद्र वीणा, रुबाब और सुरसिंगार जैसे संगीत शैलियों का अध्ययन किया।

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रविशंकर ने 1939 में सार्वजनिक रूप से अपना प्रदर्शन शुरू किया, इसकी शुरुआत उन्होंने सरोद वादक अली अकबर खान के साथ जुगलबंदी के साथ की।

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इनका संगीत देश की सरहदों तक का भी मोहताज नहीं रहा। विश्व संगीत में दिए जाने वाले सबसे प्र​सिद्ध ग्रैमी अवॉर्ड तक अपने नाम किया। 1999 में उन्हें देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया।

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