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युवा बौद्ध शोध के चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन, 'आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग' थीम पर हुई चर्चा

युवा बौद्ध शोध के चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन, 'आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग' थीम पर हुई चर्चा
युवा बौद्ध शोध के चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन, 'आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग' थीम पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। युवा बौद्ध शोध के चौथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीवाईबीएस) का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) ने केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (सीआईएचटीएस) के साथ मिलकर सारनाथ में चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 'आज की पीढ़ी के लिए बुद्ध का मध्यम मार्ग' थीम पर किया।

आईबीसी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा जानकारी के अनुसार, दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आईबीसी के सेक्रेटरी जनरल शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे ने वैश्विक संघर्ष और तनाव के बीच शांति और बातचीत के लिए मध्यम मार्ग को एक सही समय का फ्रेमवर्क बताया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री मोदी के उस संदेश को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने दुनिया को 'बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं।'

मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, कुलपति बीएचयू, ने कहा कि मध्यम मार्ग केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए भी एक सजग प्रयास है।

सीआईएचटीएस के कुलपति वेन. प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी ने करुणा के लिए गाइड के तौर पर चार आर्य सत्य और आश्रित उत्पत्ति पर बात की। आईबीसी के डीजी राघव प्रसाद भटनागर ने स्कॉलर्स से 'धम्म सेतु' बनने की अपील की यानी बुद्ध के ज्ञान को आगे ले जाने वाला माध्यम।

बता दें, युवा बौद्ध विद्वानों के तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) ने डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) के सहयोग से, नई दिल्ली स्थित डीएआईसी के नालंदा सभागार में सफलतापूर्वक किया था।

तीसरे सम्मेलन का विषय था, "21वीं सदी में बुद्ध धम्म में ज्ञान का संचरण।" इस वार्षिक सम्मेलन में रूस, वियतनाम, कंबोडिया, श्रीलंका, म्यांमार, ताइवान और भारत सहित कई देशों के युवा विद्वान, प्रोफेसर, भिक्षु और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए थे।

इस सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हुई थी कि करुणा, सजगता और नैतिक आचरण पर आधारित बुद्ध धम्म को आधुनिक युग में डिजिटल नवाचार, अंतर-सांस्कृतिक संवाद, शिक्षा और व्यक्तिगत अभ्यास के माध्यम से किस प्रकार सार्थक रूप से प्रसारित किया जा सकता है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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