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राहुल गांधी के समर्थन में उतरे युवा प्रदर्शनकारी, पुलिस पर फूटा गुस्सा: 'प्राइवेट पार्ट पर मारा, गुंडों के कहने पर किया अरेस्ट!'

राहुल गांधी के समर्थन में उतरे युवा प्रदर्शनकारी, पुलिस पर फूटा गुस्सा: 'प्राइवेट पार्ट पर मारा, गुंडों के कहने पर किया अरेस्ट!'

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़े कुछ युवाओं ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें लाठियों से पीटा गया, शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चोट पहुंचाई गई और कुछ लोगों के साथ कथित तौर पर बेहद अपमानजनक व्यवहार किया गया।

इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। वहीं, कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं के प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराना अपराध नहीं है और युवाओं को इसके लिए जेल भेजना गलत है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।‘प्राइवेट पार्ट पर भी मारा’, प्रदर्शनकारियों ने क्या आरोप लगाए?

लॉ ग्रेजुएट और रिसर्चर अर्जुन उन्नीकृष्णन ने आरोप लगाया कि हिरासत में मौजूद लोगों को शरीर पर लात-घूंसे मारे गए। उनके मुताबिक, कुछ लोगों के सीने, पीठ और प्राइवेट पार्ट पर भी चोट पहुंचाई गई। उन्होंने दावा किया कि हिरासत में भीड़ होने के कारण लोगों के पास बचने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी।

अर्जुन ने कथित चोटों के दस्तावेजी सबूत जुटाने के लिए रिहाई के बाद अस्पताल जाने की बात भी कही। रिपोर्ट में उनके मेडिकल-लीगल सर्टिफिकेट (MLC) का जिक्र है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना जरूरी है। 

एक युवक ने कोहनी में फ्रैक्चर होने का दावा किया

रिपोर्ट में बिहार के किशनगंज निवासी निहाल आलम का मामला भी सामने आया है। निहाल के मुताबिक, वह अपनी बहन से मिलने के लिए दिल्ली आए थे। उनका दावा है कि उन्हें प्रदर्शन से जुड़ी कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया और पुलिस बस में उनके साथ मारपीट हुई।

निहाल ने आरोप लगाया कि चोट लगने के बाद भी उन्हें तत्काल उचित उपचार नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड में उनकी दाहिनी कोहनी के पास फ्रैक्चर दर्ज होने की बात कही गई है।अगर हिरासत के दौरान किसी व्यक्ति के साथ मारपीट हुई है, तो यह गंभीर मामला है। इसकी निष्पक्ष जांच, मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करना जरूरी होगा। वकील ने भी पुलिस चौकी में पिटाई का आरोप लगाया

दिल्ली के वकील फिदाल टॉम ने भी आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में लेकर संजय कॉलोनी स्थित पुलिस चौकी में पीटा गया। उनके मुताबिक, उन्होंने जब सादे कपड़ों में मौजूद एक व्यक्ति के व्यवहार पर सवाल उठाया, तो उन्हें अलग ले जाकर लाठियों से पीटा गया।रिपोर्ट के अनुसार, फिदाल के मेडिकल रिकॉर्ड में चेहरे, आंख के ऊपर, दोनों हाथों और पीठ पर चोटों का उल्लेख किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपनी पहचान वकील के रूप में बताई, जिसके बाद कथित मारपीट बंद हुई।दूसरी ओर, रिपोर्ट में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा गया कि पुलिस को इन आरोपों के संबंध में कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। अधिकारी ने कहा कि शिकायत मिलने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। 

राहुल गांधी ने युवाओं के समर्थन में क्या कहा?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके CJP के प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा फहराना अपराध नहीं है और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है।राहुल गांधी ने यह भी कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA ब्लॉक अलग-अलग बैनर के तहत प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन उनके आंदोलनों का उद्देश्य नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की मांग करना है। उन्होंने जंतर-मंतर को जनता का बताते हुए कहा कि उसे वापस हासिल किया जाएगा। 

आखिर किस मुद्दे पर हो रहा है दिल्ली में प्रदर्शन?

दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की प्रमुख वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नाराजगी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए गए सवाल हैं।विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं और इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। वे चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी भी तरह के पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि पात्र मतदाता, जिनके नाम हट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसलिए मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष, दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है। 

CJP नेताओं की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद

प्रदर्शन से जुड़े CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया। 14 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।राहुल गांधी ने उनकी हिरासत पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और तिरंगा फहराने के लिए युवाओं को जेल में डालना गलत है। वहीं, पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक पक्ष यह है कि निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का पालन कराना जरूरी है। 

अब सबसे बड़ा सवाल: आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?

हिरासत में मारपीट के आरोप सामने आने के बाद अब मेडिकल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, हिरासत केंद्रों की जानकारी और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच अहम हो गई है।अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या पुलिसकर्मी को दोषी मान लेना भी उचित नहीं होगा।

दिल्ली में यह मामला अब सिर्फ प्रदर्शन और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिरासत में लोगों के अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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