योगी सरकार का डिजिटल एक्शन प्लान तैयार, पुलिस से अदालत तक एक क्लिक पर जुड़ेगी न्याय व्यवस्था
लखनऊ, 5 नवंबर (आईएएनएस)। योगी सरकार प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के साथ न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक, पारदर्शी और समयबद्ध करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप पुलिस व्यवस्था के तकनीकी आधुनिकीकरण, फॉरेंसिक जांच की क्षमता बढ़ाने और न्याय प्रणाली के विभिन्न अंगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में प्रदेश में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएमएस) को प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य पुलिस, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, अभियोजन, कारागार और न्यायालयों को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि अपराध की जांच से लेकर न्यायिक निर्णय तक की प्रक्रिया अधिक सुगम और प्रभावी हो सके।
नए आपराधिक कानूनों (एनसीएल) के क्रियान्वयन में प्रदेश ने लगातार प्रगति दर्ज की है। 12 सितंबर-26 के एनसीएल रैंकिंग डैशबोर्ड के अनुसार, प्रदेश का कुल स्कोर 85.99 अंक पहुंच गया है, जबकि 25 जून-26 को यह 78.13 अंक था। इस तरह लगभग ढाई महीने में प्रदेश के स्कोर में 7.86 अंकों का सुधार हुआ है। 20 जुलाई को यह स्कोर 82.05, 19 अगस्त को 84.92 और 1 सितंबर को 85.47 अंक दर्ज किया गया था।
डैशबोर्ड के अनुसार, नोटिफिकेशन जारी करने और मॉडल रूल्स लागू करने के मामले में प्रदेश को 10-10 अंक मिले हैं। वहीं, आईसीजेएस इंटीग्रेशन और एमईडीएलईएपीआर पोर्टल के क्रियान्वयन में भी 10-10 अंक हासिल हुए हैं। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) के इस्तेमाल में भी प्रदेश ने पांच में से पांच अंक प्राप्त किए हैं। ई-साक्ष्य के इस्तेमाल में 10 में से 6.57 अंक, ई-समन में 10 में से 6.74 अंक और न्याय श्रुति में पांच में से पांच अंक मिले हैं। इसे प्रत्येक माह क्राइम मीटिंग में समीक्षा के जरिये प्राप्त किया गया है। इसके साथ ही ई-साक्ष्य मॉनिटरिंग और 60 व 90 दिनों में जांच पूरी करने की अनुपालना के लिए अलग डैशबोर्ड विकसित किया गया है। न्यायालयों से संबंधित मानकों में सुधार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को एनसीएल डैशबोर्ड का एक्सेस भी उपलब्ध कराया गया है।
प्रदेश में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधों की जांच को मजबूत बनाने के लिए ई-फॉरेंसिक 2.0 लागू किया गया है। जुलाई-26 से शुरू इस व्यवस्था के तहत अब तक 6,334 केस प्राप्त हुए हैं और 535 मामलों की रिपोर्टिंग की जा चुकी है। इसके माध्यम से केस रजिस्ट्रेशन, आवंटन, रिपोर्ट तैयार करने और केस डिस्पैच जैसे कार्य ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी है।
सभी प्रयोगशालाओं के प्रत्येक अनुभाग में कम से कम दो हाई-एंड डेस्कटॉप की आवश्यकता बताई गई है। इसके तहत 12 प्रयोगशालाओं के आठ-आठ अनुभागों के लिए कुल 192 हाई-एंड डेस्कटॉप की मांग प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त केस से संबंधित महत्वपूर्ण डिजिटल डाटा को सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (एनएएस) या क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था की आवश्यकता बताई गई है। फॉरेंसिक जांच को थानों से जोड़ने के लिए सीसीटीएनएस के माध्यम से डाटा एंट्री और क्यूआर कोड जनरेशन की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। इससे थानों से फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं तक केस से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
आईसीजेएस 2.0 के तहत प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में नेटवर्क कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए एसडी-वैन आधारित नेटवर्क व्यवस्था और अन्य जरूरी तकनीकी संसाधनों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। पुलिस विभाग के लिए डेस्कटॉप, यूपीएस, टैबलेट, मल्टीफंक्शन प्रिंटर, वेबकैम, क्यूआर कोड रीडर और अन्य उपकरणों की खरीद की जा रही है।
वहीं, कारागार विभाग में भी तकनीकी सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। जेलों में डेस्कटॉप, बायोमेट्रिक अटेंडेंस डिवाइस, स्कैनर और वेबकैम जैसे उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट की खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और स्थापना की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। इससे जेलों और न्यायालयों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा को और मजबूत किया जा सकेगा।
--आईएएनएस
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