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योगेश गौड़ा हत्याकांड में बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री समेत 17 दोषी, कई को दोहरी उम्रकैद

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के बहुचर्चित योगेश गौड़ा हत्याकांड में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषी करार दिया है। बेंगलुरु स्थित विशेष अदालत (सांसदों/विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों के लिए) के न्यायाधीश ने 15 अप्रैल को फैसला सुनाया था, जबकि 17 अप्रैल को दोषियों को सजा सुनाई गई।
योगेश गौड़ा हत्याकांड में बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री समेत 17 दोषी, कई को दोहरी उम्रकैद

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के बहुचर्चित योगेश गौड़ा हत्याकांड में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषी करार दिया है। बेंगलुरु स्थित विशेष अदालत (सांसदों/विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों के लिए) के न्यायाधीश ने 15 अप्रैल को फैसला सुनाया था, जबकि 17 अप्रैल को दोषियों को सजा सुनाई गई।

इस मामले में धारवाड़ के विधायक और कर्नाटक सरकार में खान एवं भूविज्ञान के पूर्व राज्य मंत्री विनय राजशेखरप्पा कुलकर्णी को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए दोहरी आजीवन कारावास और 90 हजार रुपए के जुर्माने की सजा दी गई है।

अदालत ने कुलकर्णी के चाचा और सह-आरोपी चंद्रशेखर इंडी को भी समान धाराओं—आईपीसी की धारा 120-बी, 302 और 201—के तहत दोषी ठहराते हुए दोहरी उम्रकैद और 90 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। इसके अलावा, इस मामले में अन्य 14 आरोपियों विक्रम बल्लारी, कीर्तिकुमार कुरहट्टी, संदीप सौदत्ती उर्फ सैंडी, विनायक कटागी, महाबलेश्वर होंगल उर्फ मुडाका, संतोष सवादत्ती, दिनेश, अश्वत्था, सुनील, नजीर अहमद, शाहनवाज, नूतन, हर्षित सी. और विकास कलबुर्गी को भी साजिश, हत्या और दंगा संबंधी धाराओं के तहत दोहरी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, साथ ही प्रत्येक पर 96 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

मामले में आरोपी पुलिस निरीक्षक सी. टिंगेरिकर को भी दोषी पाते हुए अदालत ने उन्हें 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उन पर आईपीसी की धारा 120-बी, 201 और 218 के तहत 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि कुल जुर्माने की राशि में से 16 लाख रुपये मृतक के बच्चों को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।

गौरतलब है कि योगेश गौड़ा की 15 जून 2016 को धारवाड़ में उनके जिम के अंदर हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस द्वारा की गई थी, लेकिन बाद में कर्नाटक सरकार ने इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया। सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कई लोग शामिल थे और साक्ष्यों को मिटाने की भी कोशिश की गई थी।

जांच के दौरान कुल 21 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। मुकदमे के दौरान 113 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, 291 दस्तावेज और 32 भौतिक साक्ष्य अदालत में पेश किए गए। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने 15 अप्रैल 2026 को 17 आरोपियों को दोषी ठहराया और 17 अप्रैल को उन्हें सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने 10 गवाहों के खिलाफ झूठी गवाही (परजरी) के मामले में भी कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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