वाह रे पाकिस्तान! ‘डॉक्टर’ ने लकवाग्रस्त मरीज का पैरों से किया अजीबोगरीब इलाज, VIDEO देख लोगों ने पीट लिया माथा
दुनिया भर के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। कभी कोई वीडियो लोगों को सीख देता है, तो कभी हंसी और गुस्सा भी दिलाता है। ऐसा ही एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पाकिस्तान का है, जहां एक डॉक्टर अपने गंदे पैरों से लकवाग्रस्त मरीज़ का इलाज करता दिख रहा है। इलाज के इस अनोखे तरीके से लोग हैरान और गुस्से में हैं। कुछ लोगों ने मज़ाक में इसे "जादुई इलाज" कहा है, तो कुछ ने कथित डॉक्टर की कड़ी बुराई की है।
वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक लकवाग्रस्त मरीज़ बिस्तर पर लेटा हुआ है, तभी पास में खड़ा एक आदमी पारंपरिक तरीकों से उसका इलाज करने के बजाय, अपने गंदे पैरों से खौलते तेल को छूता है और फिर मरीज़ के शरीर पर अपने पैर रगड़ने लगता है। वह मरीज़ के हाथों से तेल उसके पैरों पर मलता है, फिर कहता है कि मरीज़ ठीक हो गया है। फिर वह मरीज़ से पानी की एक बाल्टी उठाने को कहता है, जिसे मरीज़ आसानी से उठा लेता है, हालांकि उसका कहना है कि वह पहले इसे नहीं उठा पाता था। इस अजीब इलाज को देखकर लोग अब हैरान हैं और कह रहे हैं कि अब डॉक्टरों की ज़रूरत नहीं है।
A man in Pakistan suffered a stroke and got paralyzed.
— Incognito (@Incognito_qfs) September 12, 2025
Pakistani Doctor touched boiling oil with his dirty feet and rubbed his feet on the patient's body.
The patient miraculously recovered and even lifted the bucket of water after a year.
Soon, you will find such hospitals in… pic.twitter.com/uNyO0EeSG1
यह चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @Incognito_qfs नाम के एक यूज़र ने शेयर किया है, जिसके कैप्शन में पूरी कहानी बताई गई है। कैप्शन में लिखा है, "पाकिस्तान में एक आदमी को स्ट्रोक आया और वह पैरालाइज़ हो गया। पाकिस्तानी डॉक्टर ने अपने गंदे पैरों से मरीज़ के शरीर पर खौलता हुआ तेल लगाया। मरीज़ चमत्कारिक रूप से ठीक हो गया और एक साल बाद, पानी से भरी बाल्टी उठाने लायक हो गया। जल्द ही, आपको इंग्लैंड, कनाडा और यूनाइटेड स्टेट्स में भी ऐसे ही हॉस्पिटल मिलेंगे।"
वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया यूज़र्स ने न सिर्फ़ इस ट्रीटमेंट को खतरनाक बताया, बल्कि इसे देने वाले की भी कड़ी आलोचना की। एक यूज़र ने लिखा, "अगर यही ट्रीटमेंट है, तो मेडिकल कॉलेज की क्या ज़रूरत है?" दूसरे यूज़र ने लिखा, "यह ट्रीटमेंट मरीज़ के साथ खेलने जैसा कम लगता है।"

