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बच्चों के लिए डिजिटल मीडिया पर बनेगी सख्त नीति? वीडियो में जाने सर्वे में स्कूलों में स्मार्टफोन बैन और उम्र के हिसाब से ऑनलाइन एक्सेस की सिफारिश

बच्चों के लिए डिजिटल मीडिया पर बनेगी सख्त नीति? वीडियो में जाने सर्वे में स्कूलों में स्मार्टफोन बैन और उम्र के हिसाब से ऑनलाइन एक्सेस की सिफारिश

बच्चों के बढ़ते डिजिटल मीडिया इस्तेमाल और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक नई रिपोर्ट में देशभर के लिए व्यापक नीति बनाने की मांग की गई है। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज की ओर से जारी रिपोर्ट में स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक उम्र के आधार पर पहुंच देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में डिजिटल प्लेटफॉर्म की कानूनी जवाबदेही तय करने और नियमों का उल्लंघन होने पर कंपनियों पर जुर्माने का प्रावधान करने की बात कही गई है।

‘प्रिवेंशन बाय डिजाइन: फ्रॉम वॉलंटरी सेल्फ-रेगुलेशन टू अ स्टेट ड्यूटी ऑफ केयर’ नाम से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की जिम्मेदारी केवलबच्चों या उनके माता-पिता पर नहीं डाली जानी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने डिजाइन और संचालन में शुरुआत से ही बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।रिपोर्ट को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े एक कार्यक्रम में जारी किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘रिस्पॉन्सिबल AI एंड सेफ डिजिटल स्पेसेज फॉर चिल्ड्रन’ था। इसमें बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

रिपोर्ट तैयार करने वालों ने 40 से ज्यादा देशों में उम्र के आधार पर डिजिटल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों और नियमों का अध्ययन किया। इसके अलावा 110 देशों में स्कूलों की स्मार्टफोन नीतियों की तुलना की गई। रिपोर्ट में अलग-अलग देशों में अपनाए गए नियमों और उनके पीछे मौजूद नीतिगत दृष्टिकोण का विश्लेषण किया गया है।रिपोर्ट का मुख्य तर्क है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को केवल प्लेटफॉर्म की स्वैच्छिक सेल्फ-रेगुलेशन व्यवस्था पर निर्भर नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए सरकारों को स्पष्ट कानूनी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल कंपनियों के लिए ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए, जिनके तहत उन्हें बच्चों को संभावित ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए पहले से सुरक्षा उपाय लागू करने पड़ें।

रिपोर्ट में उम्र के आधार पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच को नियंत्रित करने की सिफारिश भी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप डिजिटल सेवाओं और कंटेंट तक पहुंच देना है। साथ ही स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को सीमित या प्रतिबंधित करने की नीति पर भी विचार करने की बात कही गई है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनकी कानूनी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर आर्थिक दंड लगाया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार इसका पूरा भार बच्चे या उसके माता-पिता पर डालने के बजाय प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

रिपोर्ट ने डिजिटल नुकसान होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय ‘प्रिवेंशन बाय डिजाइन’ यानी शुरुआत से ही सुरक्षा को डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिजाइन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत बच्चों के लिए बनाए या इस्तेमाल किए जाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म में उम्र, सुरक्षा, प्राइवेसी और संभावित जोखिमों को पहले से ध्यान में रखने की बात कही गई है।बच्चों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह रिपोर्ट सरकारों और डिजिटल कंपनियों की भूमिका पर नई बहस को बढ़ा सकती है। अब चुनौती ऐसी नीतियां तैयार करने की है, जिनमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के साथ उनकी डिजिटल शिक्षा और तकनीक तक उचित पहुंच के बीच संतुलन भी बना रहे।

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