पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ होगा? वीडियो में जाने विधानसभा में जल्द आ सकता है बिल
पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने की तैयारी एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कोलकाता में संकेत दिया कि राज्य सरकार विधानसभा के मौजूदा सत्र में नाम बदलने से जुड़ा बिल पेश कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह बिल इसी सत्र में विधानसभा के सामने लाया जा सकता है।समिक भट्टाचार्य वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंग भवन’ को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राज्य के नाम को लेकर सरकार की संभावित योजना की जानकारी दी। उनके मुताबिक राज्य का आधिकारिक नाम ‘पश्चिम बंग’ किए जाने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
इतिहास से जोड़ने की कोशिश
राज्य का नाम बदलने के पीछे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक ‘पश्चिम बंग’ नाम राज्य की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा हुआ है। नाम बदलने के बाद आधिकारिक तौर पर ‘पश्चिम बंगाल’ की जगह ‘पश्चिम बंग’ का इस्तेमाल किया जाएगा।समिक भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि नाम बदलने के बाद ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल’ जैसे अलग-अलग नामों के इस्तेमाल की जरूरत नहीं रहेगी। उनका कहना है कि एक आधिकारिक नाम होने से राज्य की पहचान को लेकर स्पष्टता आएगी।
1999 में भी उठा था मुद्दा
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश कोई नई नहीं है। इसका इतिहास करीब 27 साल पुराना है। वर्ष 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने राज्य का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने का प्रस्ताव रखा था।उस समय भी नाम बदलने के पीछे प्रशासनिक और ऐतिहासिक कारण बताए गए थे। हालांकि प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसके बाद अलग-अलग समय पर राज्य का नाम बदलने की मांग उठती रही।नाम बदलने का मुद्दा मुख्य रूप से राज्य के आधिकारिक नाम और उसकी ऐतिहासिक पहचान को लेकर राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इस पर चर्चाएं हुईं, लेकिन अब एक बार फिर विधानसभा के जरिए इसे आगे बढ़ाने की संभावना सामने आई है।
विधानसभा में बिल आने पर बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
अगर राज्य सरकार विधानसभा में नाम बदलने का बिल पेश करती है, तो इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। राज्य के नाम में बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि इससे सरकारी दस्तावेजों, संस्थानों और विभिन्न आधिकारिक रिकॉर्ड में भी बदलाव करना पड़ेगा।नाम बदलने के प्रस्ताव को विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि किसी राज्य का आधिकारिक नाम बदलने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।फिलहाल समिक भट्टाचार्य के बयान के बाद ‘पश्चिम बंगाल’ का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ किए जाने की चर्चा फिर तेज हो गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार मौजूदा विधानसभा सत्र में इस संबंध में बिल पेश करती है या नहीं और अगर बिल आता है तो विधानसभा में इसे लेकर क्या रुख सामने आता है।

