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क्या पृथ्वी के दिन 25 घंटे के होंगे? वैज्ञानिकों ने बताया 200 मिलियन साल बाद मुमकिन

क्या पृथ्वी के दिन 25 घंटे के होंगे? वैज्ञानिकों ने बताया 200 मिलियन साल बाद मुमकिन

वैज्ञानिकों के अनुसार भविष्य में पृथ्वी पर एक दिन की लंबाई 24 घंटे की बजाय लगभग 25 घंटे हो सकती है — लेकिन यह बदलाव इतना बड़ा और धीमा है कि आज के समय में हमें इसका कोई प्रभाव महसूस नहीं होगा।

🌍 क्यों बदल रहा है दिन का समय?

हमारी पृथ्वी हर 24 घंटे में अपनी धुरी एक बार घूमती है और इसी गति के कारण दिन-रात का चक्र बनता है। हालांकि, यह 24-घंटे का समय पूरी तरह स्थिर नहीं है। पृथ्वी की गति धीरे-धीरे धीमी होती जा रही है, जिसका मुख्य कारण है चंद्रमा की गुरुत्वीय आकर्षण शक्ति और समुद्र की ज्वार-भाटे (tidal forces)।

वैज्ञानिक बताते हैं कि चंद्रमा हर साल हमारी पृथ्वी से लगभग 3.82 सेंटीमीटर दूर जा रहा है और समय के साथ यह दूरी बढ़ती चली जाएगी। इस दूरी के बढ़ने से पृथ्वी का घूमने का तरीका धीरे-धीरे बदलता है, जिससे पृथ्वी की घूमन गति कम होती है। ऐसा होने पर एक पूरा दिन पूरा होने में अधिक समय लगेगा।

🕰️ कब हो सकता है 25-घंटे का दिन?

पिछले अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी पर दिन की लंबाई हर सदी में लगभग 1.8 मिलीसेकंड बढ़ रही है। यदि यही रफ्तार जारी रहती है, तो वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 200 मिलियन साल बाद यानी बहुत-लंबे भूवैज्ञानिक समय बाद पृथ्वी पर एक दिन लगभग 25 घंटे का हो सकता है।

यह बदलाव आज के लिए कोई चिंता की बात नहीं है और न ही अगले कई पीढ़ियों के लिए समय-तालिका में कोई बड़ा प्रभाव पड़ेगा। इसका असर इतना धीमा और विशाल समय में होने वाला है कि इंसानी जीवन या हमारी तकनीकी दिनचर्या पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

🔬 वैज्ञानिक कैसे बताते हैं यह बदलाव?

वैज्ञानिकों के पास यह अनुमान लगाने के लिए भूवैज्ञानिक डेटा और चंद्रमा-पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण के ऐतिहासिक प्रभाव का अध्ययन होता है। प्राचीन चट्टानों और तटीय स्थितियों पर अध्ययन से पता चला है कि अरबों साल पहले पृथ्वी के दिन लगभग 18 घंटे के थे, जो अब धीरे-धीरे 24 घंटे तक बढ़े हैं। इसी रफ्तार से आगे बढ़ने पर यह 25-घंटे का दिन संभव है।

हम आज 24-घंटे वाला दिन इसलिए अपनाते हैं क्योंकि हमारा समय मापन सीज़ियम घड़ियों और पृथ्वी-सूरज के चक्र से तय होता है। समय के छोटे-छोटे बदलावों को संतुलन में रखने के लिए वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कभी-कभी लीप सेकंड जोड़ते या घटाते हैं। लेकिन 25-घंटे वाला दिन एक अलग, बहुत-दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यह केवल सैंकड़ों लाखों साल बाद ही संभव हो सकता है।

🤔 क्या इसका असर हमारे जीवन पर होगा?

यह बदलाव बहुत-बहुत धीरे-धीरे होता है, इसलिए आज या आने वाली शताब्दियों में हमें दिन-रात के चक्र में कोई बदलाव महसूस नहीं होगा। लंबे समय के भूवैज्ञानिक अध्ययन के हिसाब से यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो पृथ्वी-चंद्रमा के गुरुत्वीय तलों के कारण होती रहती है।

🔎 विज्ञान का संदेश

वैज्ञानिक यह समझाते हैं कि पृथ्वी-चंद्रमा की गति और गुरुत्वाकर्षण के कारण समय की पैमाइश बदलती रहती है। आज के वैज्ञानिक उपकरणों से छोटे-छोटे बदलावों को मापा जा सकता है, लेकिन इन बदलावों का दैनिक जीवन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है। यह एक अत्यंत धीमी प्रक्रिया है जिसे हम आने वाले करोड़ों वर्षों में ही देख पाएंगे।

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