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AI से बने कंटेंट को कॉपीराइट मिलेगा या नहीं? वीडियो में CJI सूर्यकांत बोले- कानून में जवाब न हो तो संविधान दिखाएगा रास्ता

AI से बने कंटेंट को कॉपीराइट मिलेगा या नहीं? वीडियो में CJI सूर्यकांत बोले- कानून में जवाब न हो तो संविधान दिखाएगा रास्ता

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि जब कानून किसी नए सवाल का स्पष्ट जवाब देने में सक्षम न हो, तो अदालतों को संविधान के सिद्धांतों के आधार पर रास्ता तलाशना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट के कॉपीराइट और डीपफेक जैसे मामलों ने न्यायपालिका के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। तकनीक तेजी से बदल रही है, लेकिन संविधान में दिए गए गरिमा, स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता।CJI सूर्यकांत शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के 60 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि अदालतों के सामने आज ऐसे कानूनी सवाल आ रहे हैं, जिनकी कल्पना एक दशक पहले करना भी मुश्किल था। इन सवालों का समाधान मौजूदा कानूनों में आसानी से नहीं मिल सकता। ऐसे में संविधान अदालतों का मार्गदर्शन करने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

AI से तैयार कंटेंट के कॉपीराइट पर सवाल

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े कई नए सवाल पैदा किए हैं। इनमें सबसे अहम सवाल यह है कि AI की मदद से तैयार किए गए किसी लेख, तस्वीर, संगीत या अन्य रचनात्मक सामग्री को कॉपीराइट का संरक्षण मिल सकता है या नहीं।पारंपरिक कॉपीराइट कानूनों में रचनाकार और उसकी मौलिक रचना की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। लेकिन AI के जरिए तैयार होने वाले कंटेंट में इंसान और मशीन की भूमिका को लेकर नई बहस खड़ी हो गई है। ऐसे मामलों में यह तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि रचना का वास्तविक निर्माता कौन है और उस पर अधिकार किसका होना चाहिए।

डीपफेक से व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा चुनौती

CJI सूर्यकांत ने डीपफेक तकनीक से जुड़े सवालों की ओर भी ध्यान दिलाया। डीपफेक के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या वीडियो इस तरह बदला जा सकता है कि देखने वाले को वह वास्तविक लगे। इससे किसी व्यक्ति की छवि, प्रतिष्ठा और निजता को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।ऐसे मामलों में अदालतों के सामने यह चुनौती होगी कि तकनीकी विकास को बढ़ावा देते हुए लोगों के व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा कैसे की जाए। तकनीक के इस्तेमाल और नागरिकों की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।

संविधान से मिलेगा नए सवालों का जवाब

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानून हर नई तकनीक और उससे पैदा होने वाली समस्या का पहले से तैयार जवाब नहीं दे सकता। ऐसे में अदालतों को संविधान में निहित मूल्यों और अधिकारों की रोशनी में फैसले लेने होंगे।उन्होंने जोर दिया कि तकनीक चाहे कितनी भी बदल जाए, व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और समानता का संवैधानिक वादा नहीं बदलता। न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वह नए दौर की चुनौतियों का सामना करते हुए इन मूल अधिकारों की रक्षा करे।CJI सूर्यकांत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब AI, डीपफेक और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों ने रचनात्मकता और कामकाज के नए अवसर खोले हैं, लेकिन साथ ही कॉपीराइट, निजता और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े कई कानूनी सवाल भी खड़े किए हैं।

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