शादी के लिए शाकाहारी, नॉन-स्मोकर और नॉन-ड्रिंकर महिला ढूंढना क्यों बना बहस का मुद्दा? भारतीय फाउंडर के बयान पर मचा बवाल
शादी और रिश्तों को लेकर समाज में सोच लगातार बदल रही है, लेकिन कुछ पारंपरिक अपेक्षाएँ आज भी चर्चा का विषय बनी रहती हैं। हाल ही में भारतीय मूल के एक स्टार्टअप फाउंडर साईं कृष्णा का बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया, जिसके बाद उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आज के समय में शादी के लिए शाकाहारी, नॉन-स्मोकर और नॉन-ड्रिंकर महिला ढूंढना लगभग नामुमकिन हो गया है। उनके इस बयान ने आधुनिक डेटिंग संस्कृति और पारंपरिक सोच के बीच की खाई को उजागर कर दिया है।
> met with the founder of a matchmaking app
— Sai Krishna (@_skris) January 11, 2026
> she asks for deal breakers
> vegetarian, non-drinker, non-smoker (of any kind)
> says almost impossible to find
Seriously? Like seriously?
साईं कृष्णा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उनकी मुलाकात एक मैचमेकिंग ऐप की फाउंडर से हुई थी। बातचीत के दौरान जब उनसे उनके ‘डील ब्रेकर्स’ यानी शादी में किन बातों से समझौता नहीं कर सकते, पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि वे ऐसी जीवनसाथी चाहते हैं जो शाकाहारी हो, शराब न पीती हो और किसी भी तरह का धूम्रपान न करती हो। इस पर मैचमेकर ने कथित तौर पर जवाब दिया कि आज के दौर में इन सभी गुणों वाली महिला मिलना बेहद मुश्किल है।
इस जवाब से साईं कृष्णा हैरान रह गए और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वाकई समाज इस हद तक बदल चुका है। उनका यही सवाल सोशल मीडिया पर बहस का कारण बन गया। कुछ ही समय में हजारों लोगों ने इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
कई यूजर्स ने साईं कृष्णा के बयान को अतिरंजित और सामान्यीकरण बताया। उनका कहना था कि ऐसी महिलाएं आज भी मौजूद हैं, लेकिन वे डेटिंग ऐप्स पर कम और पारंपरिक पारिवारिक या सामाजिक माध्यमों से ज्यादा मिलती हैं। कुछ लोगों ने सलाह दी कि अगर पारंपरिक जीवनशैली की पार्टनर चाहिए, तो रिश्ते भी पारंपरिक तरीकों से ढूंढने चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने इस सोच की आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान महिलाओं की जीवनशैली को लेकर अनुचित धारणा बनाता है। आलोचकों का कहना था कि आज महिलाएं अपनी पसंद से जी रही हैं और उनके खान-पान या आदतों को लेकर उन्हें जज करना सही नहीं है। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि रिश्तों में केवल आदतें नहीं, बल्कि समझ, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा मायने रखते हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आज के दौर में शादी के लिए कठोर मानदंड तय करना सही है? या फिर बदलते समय के साथ सोच में लचीलापन जरूरी है? विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समाज में रिश्तों की परिभाषा बदल रही है। लोग अब करियर, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद को पहले रखते हैं, जिससे पारंपरिक अपेक्षाएं पीछे छूटती जा रही हैं।
कुल मिलाकर, साईं कृष्णा का बयान केवल एक व्यक्ति की राय नहीं रह गया, बल्कि यह आधुनिक डेटिंग संस्कृति बनाम पारंपरिक मूल्यों की बहस का प्रतीक बन गया है। यह चर्चा बताती है कि समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां पुरानी सोच और नई जीवनशैली के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।

