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फिल्मों में जज क्यों पटकते हैं लकड़ी का हथौड़ा? जानिए ‘गैवल’ की असली कहानी और भारत में इसका इस्तेमाल
 

फिल्मों में जज क्यों पटकते हैं लकड़ी का हथौड़ा? जानिए ‘गैवल’ की असली कहानी और भारत में इसका इस्तेमाल


बॉलीवुड फिल्मों और टीवी सीरियल्स में कोर्ट रूम का सीन आते ही एक तस्वीर अक्सर देखने को मिलती है—जज जोर से कहते हैं, “ऑर्डर-ऑर्डर!” और इसके साथ ही मेज पर लकड़ी का छोटा हथौड़ा पटकते हैं। इस हथौड़े को गैवल (Gavel) कहा जाता है।

फिल्मों में इसे अदालत की पहचान की तरह पेश किया जाता है, लेकिन सवाल यह है कि गैवल की शुरुआत आखिर क्यों हुई? क्या जज वास्तव में कोर्ट में इसका इस्तेमाल करते हैं? और भारतीय अदालतों में इसका कितना चलन है? आइए जानते हैं।

क्या होता है गैवल?

गैवल लकड़ी का एक छोटा हथौड़ा होता है, जिसे पारंपरिक रूप से कोर्ट रूम में शांति और व्यवस्था बनाए रखने से जोड़ा जाता है।

जब अदालत में मौजूद लोग एक साथ बोलने लगें, बहस के दौरान शोर बढ़ जाए या कोई व्यक्ति बिना अनुमति के बोलने लगे, तो जज का उद्देश्य सभी का ध्यान अपनी ओर खींचना और कार्यवाही को व्यवस्थित करना होता है। पारंपरिक रूप से इसी काम के लिए गैवल को साउंड ब्लॉक पर मारकर आवाज पैदा की जाती थी।

इस आवाज का सीधा संदेश होता था कि कोर्ट की कार्यवाही पर ध्यान दिया जाए और अनुशासन बनाए रखा जाए।

सिर्फ हथौड़ा नहीं, अधिकार का प्रतीक भी

समय के साथ गैवल केवल शोर रोकने का उपकरण नहीं रहा। यह न्यायाधीश के अधिकार, गरिमा और कोर्ट की कार्यवाही पर नियंत्रण का प्रतीक बन गया।

कोर्ट में जज की जिम्मेदारी होती है कि दोनों पक्षों को अपनी दलील रखने का उचित और निष्पक्ष अवसर मिले। ऐसे में कार्यवाही में अव्यवस्था होने पर उसे नियंत्रित करना भी न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

इसी वजह से गैवल को धीरे-धीरे न्यायिक अधिकार के प्रतीक के तौर पर देखा जाने लगा।

कहां से आई गैवल की परंपरा?

गैवल से जुड़ी परंपरा मुख्य रूप से अंग्रेजी बोलने वाली कानूनी और औपचारिक व्यवस्थाओं से जोड़ी जाती है। इसके पीछे मूल विचार कोर्ट की कार्यवाही में अनुशासन बनाए रखने का था।

एक प्रचलित मान्यता के मुताबिक, पुराने समय में इंग्लैंड में जज अव्यवस्था होने पर लकड़ी की मेज या डेस्क पर हाथ या किसी लकड़ी की वस्तु से आवाज करके लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते थे। समय के साथ इसी तरह की आवाज पैदा करने के लिए अलग लकड़ी के हथौड़े का इस्तेमाल होने लगा।

बाद में गैवल अदालतों के साथ-साथ अन्य औपचारिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का भी हिस्सा बन गया।

क्या भारतीय अदालतों में आज भी गैवल इस्तेमाल होता है?

यहीं पर फिल्मों और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर सामने आता है।

फिल्मों और टीवी सीरियल्स में भारतीय जज को बार-बार गैवल पटकते हुए “ऑर्डर-ऑर्डर” कहते दिखाया जाता है। लेकिन आधुनिक भारतीय अदालतों में गैवल का इस्तेमाल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।

ब्रिटिश दौर में इस तरह की परंपराओं का प्रभाव भारत में भी रहा था, लेकिन आज भारतीय अदालतों में जज आमतौर पर मौखिक निर्देश, कोर्ट की निर्धारित प्रक्रिया और अन्य न्यायिक उपायों के जरिए कार्यवाही को नियंत्रित करते हैं।

जरूरत पड़ने पर कोर्ट स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था भी अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है।

फिर फिल्मों में बार-बार क्यों दिखता है गैवल?

कोर्ट रूम में हथौड़ा पटकने वाला दृश्य फिल्मों के लिए काफी प्रभावी है। जज का “ऑर्डर-ऑर्डर” कहना और उसी समय हथौड़े की तेज आवाज दर्शकों को तुरंत यह संकेत देती है कि अदालत में हंगामा हो रहा था और अब जज ने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया है।

यानी फिल्मों में गैवल एक नाटकीय और पहचानने योग्य प्रतीक बन चुका है, लेकिन इसे भारतीय अदालतों की रोजमर्रा की वास्तविक कार्यवाही समझना सही नहीं होगा।

अमेरिका में गैवल आज भी क्यों मशहूर है?

गैवल का इस्तेमाल और उसकी पहचान अमेरिकी कानूनी और औपचारिक संस्कृति से काफी मजबूती से जुड़ी हुई है। अमेरिका में कोर्ट रूम के अलावा कई औपचारिक बैठकों और प्रक्रियाओं में भी गैवल देखने को मिल सकता है।

अदालतों के बाहर भी इसका एक अलग इस्तेमाल देखने को मिलता है। खासकर नीलामी करने वाले व्यक्ति बिक्री पूरी होने या किसी बोली को अंतिम रूप देने के संकेत के तौर पर गैवल का इस्तेमाल करते हैं।

इस तरह गैवल आज भी अधिकार, व्यवस्था और अंतिम निर्णय का प्रतीक बना हुआ है।

असली अदालत बनाम फिल्मों की अदालत

तो अगली बार जब किसी फिल्म में जज मेज पर लकड़ी का हथौड़ा पटककर “ऑर्डर-ऑर्डर” कहें, तो याद रखिए कि यह दृश्य वास्तविक भारतीय अदालत की रोजमर्रा की प्रक्रिया से ज्यादा सिनेमाई प्रस्तुति है।

गैवल का इतिहास भले ही अदालत और न्यायिक अधिकार से जुड़ा रहा हो, लेकिन भारतीय अदालतों में आज न्यायिक अनुशासन बनाए रखने के लिए हथौड़े की आवाज से ज्यादा कानून, प्रक्रिया और जज के आदेश की भूमिका होती है।
 

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