Samachar Nama
×

जनवरी में थोक और रिटेल महंगाई में तेजी, फुटेज में देंखे 10 महीनों में सबसे अधिक

जनवरी में थोक और रिटेल महंगाई में तेजी, फुटेज में देंखे 10 महीनों में सबसे अधिक

जनवरी 2026 में थोक महंगाई (Wholesale Price Index - WPI) 1.81% पर पहुंच गई है, जो पिछले महीने दिसंबर 2025 में 0.83% थी। यह पिछले 10 महीनों में थोक महंगाई की सबसे अधिक वृद्धि है। इसके पहले मार्च 2025 में WPI 2.05% पर दर्ज की गई थी।

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज, 16 फरवरी को थोक महंगाई के आधिकारिक आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में थोक महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से ईंधन, खाद्य पदार्थ और निर्माण सामग्री की बढ़ी कीमतों के कारण हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोक स्तर पर महंगाई बढ़ने से आने वाले महीनों में उपभोक्ता स्तर पर भी कीमतों में वृद्धि का असर पड़ सकता है।

साथ ही, जनवरी में रिटेल महंगाई (CPI) भी पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 2.75% पर पहुंच गई है, जबकि दिसंबर में यह 1.33% थी। यह आठ महीनों में रिटेल महंगाई का सबसे अधिक स्तर है। इससे पहले मई 2025 में रिटेल महंगाई 2.82% पर थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल और थोक महंगाई दोनों में तेजी मौसमी कारकों, ईंधन और सब्ज़ियों की बढ़ती कीमतों के कारण आई है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का भी महंगाई पर असर देखा जा रहा है।

वित्तीय और आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई दर में यह तेजी उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता और मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती है। अगर महंगाई इसी रफ्तार से बढ़ती रहती है, तो केंद्रीय बैंक (RBI) को ब्याज दरों में बदलाव पर विचार करना पड़ सकता है।

केंद्रीय सरकार के लिए यह आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि थोक और रिटेल महंगाई के स्तर से नीतिगत फैसले और आर्थिक रणनीति तय की जाती है। व्यापारियों और निवेशकों के लिए भी यह संकेतक है कि कीमतों में संभावित बदलाव के अनुसार योजना बनाना जरूरी है।

कुल मिलाकर, जनवरी 2026 में थोक महंगाई 1.81% और रिटेल महंगाई 2.75% पर पहुंच गई है, जो क्रमशः पिछले 10 और 8 महीनों में सबसे अधिक है। यह संकेत देता है कि देश में मुद्रास्फीति पर निगरानी और आर्थिक नीतियों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।

Share this story

Tags