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भामाशाह अनाज मंडी में गेहूं खरीद बनी किसानों के लिए राहत और परेशानी दोनों का कारण

भामाशाह अनाज मंडी में गेहूं खरीद बनी किसानों के लिए राहत और परेशानी दोनों का कारण

राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के लिए इन दिनों कोटा की भामाशाह अनाज मंडी उम्मीद और परेशानी दोनों का केंद्र बनी हुई है। केंद्र सरकार की ओर से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से 2700 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से गेहूं की खरीद की जा रही है, जो वर्तमान बाजार भाव से करीब 400 रुपये अधिक बताई जा रही है। इस बढ़ी हुई कीमत से किसानों को आर्थिक लाभ की उम्मीद तो है, लेकिन इसके साथ ही कई प्रशासनिक और व्यवस्थागत चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस बेहतर समर्थन मूल्य का लाभ उठाने के लिए किसानों को मंडी और खरीद केंद्रों पर लंबी प्रक्रिया और सिस्टम से जुड़ी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि तुलाई, पंजीकरण और स्लॉट बुकिंग जैसी प्रक्रियाओं में समय अधिक लग रहा है, जिससे उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

किसानों के अनुसार, मंडी में भीड़ अधिक होने के कारण इंतजार का समय बढ़ गया है और कई बार उनका नंबर आने में देरी हो रही है। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि परिवहन और अन्य खर्चों में भी वृद्धि हो रही है।

वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि इस बार गेहूं खरीद व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और टोकन सिस्टम लागू किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या बिचौलियों की भूमिका को रोका जा सके। अधिकारियों का दावा है कि व्यवस्था को सुचारू बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं और धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत की बात है, लेकिन यदि खरीद प्रक्रिया सरल और समयबद्ध नहीं हुई तो इसका पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा।

कई किसान संगठनों ने भी मांग की है कि खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े और वे आसानी से अपनी उपज बेच सकें।

फिलहाल, कोटा की भामाशाह मंडी में गेहूं खरीद का कार्य जारी है, लेकिन किसानों के लिए यह व्यवस्था जहां एक ओर आर्थिक राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर प्रक्रिया संबंधी चुनौतियां भी उनके लिए बड़ी समस्या बनी हुई हैं।

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