Samachar Nama
×

वॉर गेमिंग और डिजिटल सिमुलेशन से तेज होंगे सैन्य फैसले, युद्ध की सटीक रणनीति बनाने में मिलेगी मदद

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय सेना अब केवल सरहद पर ही नहीं, बल्कि डेटा और सिमुलेशन की दुनिया में भी दुश्मनों को पछाड़ने के लिए तैयार है। सेना वॉर गेमिंग और सिमुलेशन की मदद से युद्ध की सटीक रणनीति बनाने व निर्णय लेने की क्षमता को विकसित कर रही है।
वॉर गेमिंग और डिजिटल सिमुलेशन से तेज होंगे सैन्य फैसले, युद्ध की सटीक रणनीति बनाने में मिलेगी मदद

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय सेना अब केवल सरहद पर ही नहीं, बल्कि डेटा और सिमुलेशन की दुनिया में भी दुश्मनों को पछाड़ने के लिए तैयार है। सेना वॉर गेमिंग और सिमुलेशन की मदद से युद्ध की सटीक रणनीति बनाने व निर्णय लेने की क्षमता को विकसित कर रही है।

भारतीय सेना ने वॉर गेमिंग और सिमुलेशन के माध्यम से सैन्य निर्णय-निर्माण को सशक्त बनाने, ज्ञान और उद्योग के बीच की खाई को पाटने पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया है। यह आयोजन शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में सेना के वॉर गेमिंग डेवलपमेंट सेंटर द्वारा किया गया।

दरअसल, आधुनिक युद्धक्षेत्र अब केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। निर्णय की गति, सटीक सूचना और बहुआयामी समन्वय ही सफलता तय करते हैं। ऐसे में वॉर गेमिंग और कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन सैन्य कमांडरों को संभावित परिस्थितियों का पहले से अभ्यास करने का अवसर देते हैं। इससे असली ऑपरेशन से पहले रणनीति की जांच, विकल्पों का मूल्यांकन और जोखिम का आकलन संभव हो पाता है।

इस आयोजन ने इस बात को रेखांकित किया कि आधुनिक और भविष्य के बहु-आयामी युद्धक्षेत्रों में वॉर गेमिंग अब केवल अभ्यास नहीं, बल्कि ऑपरेशनल योजना निर्माण व नेतृत्व विकास के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली उपकरण बन चुका है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह सेमिनार केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि देशभर के वॉर गेमिंग तंत्र को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास था। इसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, शिक्षाविद, रणनीतिक विश्लेषक और प्रौद्योगिकी उद्योग के विशेषज्ञ शामिल हुए। उद्देश्य था सैन्य जरूरतों, अकादमिक शोध और उद्योग की तकनीकी क्षमता के बीच तालमेल स्थापित करना। साथ ही भविष्य के युद्धों के लिए एक समन्वित और आत्मनिर्भर ढांचा तैयार करना।

सेमिनार का उद्घाटन आर्मी ट्रेनिंग कमान के जनरल ऑफिसर, कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि वॉर गेमिंग केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच को तेज करने का माध्यम है। सिमुलेशन आधारित विश्लेषण को संस्थागत योजना प्रक्रिया में शामिल करना आवश्यक है, ताकि परिचालन तैयारी और निर्णय में श्रेष्ठता सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी प्रमुख प्राथमिकता बताया। यह उच्च स्तरीय चर्चा तीन प्रमुख आयामों पर केंद्रित रही। यहां सैन्य दृष्टिकोण से बहु-आयामी सिमुलेशन को पेशेवर दक्षता का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। शैक्षणिक दृष्टिकोण से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण, व्यवहार विज्ञान और तंत्र अभियांत्रिकी में शोध सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की गई।

कार्यक्रम के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें उन्नत सिमुलेशन प्लेटफॉर्म और तकनीकी समाधान प्रदर्शित किए गए। सेमिनार के दौरान तीन स्वदेशी सॉफ्टवेयर आधारित निर्णय-सहायता प्रणालियां भी जारी की गईं। इनमें ऑटो इवैल्यूएशन मैप मार्किंग टूल, कॉम्बैट डिसीजन रेजोल्यूशन और ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस प्रिपरेशन ऑफ द बैटलफील्ड शामिल हैं। ये प्रणालियां विभिन्न स्तरों पर सैन्य कमांडर्स को त्वरित निर्णय लेने में मदद करेंगी।

यह पहल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नई सदी की नई सेना के इस कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिन्वाला ने दोहराया कि भविष्य का युद्ध वही जीतेगा जिसके पास 'स्पीड' और 'सही सूचना' होगी। भारतीय सेना ने आज साबित कर दिया कि वह न केवल अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, बल्कि उसकी सोच भी पूरी तरह आत्मनिर्भर और डिजिटल है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएसएच

Share this story

Tags