वृंदावन गुरुकुल हादसा: सेप्टिक टैंक साफ कर रहे 4 छात्रों की दम घुटने से मौत, परिजनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
मथुरा, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। मथुरा के वृंदावन स्थित एक संस्कृत गुरुकुल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में जयंती माता शक्ति पीठ, हस्तिनापुर (मेरठ) के मठ पुजारी पंडित विशु शर्मा समेत 4 छात्रों की मौत हो गई। फिलहाल पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए मजिस्ट्रेट से जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जयंती माता शक्ति पीठ के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि विशु शर्मा को संस्कृत की शिक्षा के लिए 18 अगस्त 2026 को वृंदावन गुरुकुल में दाखिला कराया गया था। 51 हजार रुपये फीस तय हुई थी, जिसमें से 24 हजार रुपये ऑनलाइन जमा किए गए थे। बच्चा वहां ठीक से पढ़ाई कर रहा था और हर 4-5 दिन में बात होती थी। नवरात्रि आने के कारण उन्होंने गुरुकुल के आचार्य को फोन कर विशु को हस्तिनापुर भेजने को कहा था और आज ही उसे वापस आना था।
सुदेश कुमार ने कहा, "मंगलवार रात 10 बजे गुरुकुल प्रबंधन ने बच्चों से जबरन लैट्रिन का गंदा सेप्टिक टैंक साफ कराया। टैंक चारों तरफ से बंद है, एक आदमी का जाना भी मुश्किल है। मना करने के बावजूद बच्चों को अंदर भेजा गया। जहरीली गैस से दम घुटने लगा और वो बेहोश होकर गिर गए, वहीं चारों ने दम तोड़ दिया।" मृतक चारों बच्चे बेहद गरीब ब्राह्मण परिवारों से थे।
उनका आरोप है कि घटना के बाद गुरुकुल ने परिजनों को सूचना तक नहीं दी। पूरे यूपी में खबर फैल गई लेकिन परिजनों को पता नहीं चला। सुदेश कुमार को सूचना वृंदावन कोतवाली इंस्पेक्टर के जरिए हस्तिनापुर एसएचओ से मंगलवार रात 1:35 बजे मिली, जब दो पुलिसकर्मी आश्रम पहुंचे। इसके बाद उन्होंने आचार्य अंकुर और आशीष गुरुजी को फोन किया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
परिजन रात ढाई बजे मेरठ से वृंदावन के लिए निकले। फिलहाल पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई चल रही है। सुदेश कुमार ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने, मजिस्ट्रेट जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, योगी सरकार से गरीब परिवारों को सरकारी मदद देने की अपील की है।
हादसे में जान गंवाने वाले 17 वर्षीय देवांश का परिवार विदिशा, मध्य प्रदेश से पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचा। मृतक के बड़े भाई राघवेंद्र दुबे ने बताया कि उन्हें रात 12 बजे एक मित्र के जरिए हादसे की सूचना मिली। वह तुरंत वृंदावन के लिए रवाना हुए। देवांश का इसी साल जुलाई में गुरुकुल में संस्कृत, ज्योतिष और वेद की पढ़ाई के लिए एडमिशन कराया गया था।
राघवेंद्र ने बताया, "हम पांच भाई-बहन हैं, देवांश सबसे छोटा था। परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं। पिता खेती करते हैं।"
सोनू शर्मा ने बताया कि मेरे भांजे ने फोन कर बताया कि देवांश के साथ अन्य छात्र टैंक की सफाई कर रहे थे। सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने के कारण चारों छात्रों की मौत हो गई। इसके अलावा, हादसे में मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी मनु कटारे और आर्यन पांडेय की मौत हुई है।
--आईएएनएस
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