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विश्व हेपेटाइटिस दिवस : हर साल 13 लाख लोगों की जान ले रहा हेपेटाइटिस, समय पर जांच और इलाज से बचाई जा सकती हैं लाखों जिंदगियां

विश्व हेपेटाइटिस दिवस : हर साल 13 लाख लोगों की जान ले रहा हेपेटाइटिस, समय पर जांच और इलाज से बचाई जा सकती हैं लाखों जिंदगियां
विश्व हेपेटाइटिस दिवस : हर साल 13 लाख लोगों की जान ले रहा हेपेटाइटिस, समय पर जांच और इलाज से बचाई जा सकती हैं लाखों जिंदगियां

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की कार्यवाहक प्रमुख डॉ. कैथरीना बोहेमे ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस आज दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में शामिल है। वर्ष 2024 में दुनिया भर में 13 लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस के कारण हुई। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, सही इलाज और लगातार देखभाल से इनमें से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में लगभग 4.3 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 80 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। हर साल इस क्षेत्र में 2 लाख से अधिक लोगों की मौत लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी हेपेटाइटिस से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है।

इस वर्ष विश्व हेपेटाइटिस दिवस की वैश्विक थीम 'हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन' रखी गई है जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में इसे 'एलिमिनेटिंग हेपेटाइटिस एवरीवेयर, फॉर एवरीवन-राइट नाउ' थीम के साथ मनाया जा रहा है। इनका उद्देश्य लोगों तक रोकथाम, जांच और इलाज की सुविधाएं बिना किसी बाधा के पहुंचाना है।

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि क्षेत्र में कई सकारात्मक उपलब्धियां भी मिली हैं। 2024 में हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन की तीसरी खुराक का कवरेज 92 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2025 में मालदीव दुनिया का पहला देश बना, जिसे एचआईवी, सिफिलिस और हेपेटाइटिस-बी से ग्रसित मां से बच्चे में संक्रमण को खत्म करने के लिए मान्यता मिली। वहीं, थाईलैंड और श्रीलंका को एचआईवी और सिफिलिस से ग्रसित मां से बच्चे में संक्रमण खत्म करने की उपलब्धि के लिए मान्यता दी गई है।

थाईलैंड ने हेपेटाइटिस उपचार को अपनी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज व्यवस्था में शामिल किया है। भारत में एचआईवी और सिफिलिस के मां से बच्चे में संक्रमण को खत्म करने के राष्ट्रीय अभियान के साथ-साथ हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वहीं, बांग्लादेश ने कॉक्स बाजार जैसे मानवीय संकट वाले क्षेत्रों सहित कमजोर वर्गों के लिए हेपेटाइटिस सेवाओं का विस्तार किया है।

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि ये प्रगति ग्लोबल हेल्थ सेक्टर स्ट्रैटेजी (2022–2030) और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्ययोजना (2022–2026) के तहत संभव हुई है। इनका लक्ष्य 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करना है।

हालांकि, संगठन ने चिंता भी जताई कि अभी कई बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। क्षेत्र में जन्म के 24 घंटे के भीतर लगने वाले हेपेटाइटिस-बी टीके का कवरेज केवल 58 प्रतिशत है। वहीं, हेपेटाइटिस-बी का उपचार कवरेज सिर्फ 0.1 प्रतिशत और हेपेटाइटिस-सी का 11 प्रतिशत है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हेपेटाइटिस-बी और सी से संक्रमित हर 10 में से केवल एक व्यक्ति को ही अपनी बीमारी की जानकारी है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, असुरक्षित मेडिकल इंजेक्शन हेपेटाइटिस-सी के 21 प्रतिशत नए मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसलिए सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं को बढ़ावा देना और नशे के इंजेक्शन लेने वाले लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

डॉ. कैथरीना बोहेमे ने कहा कि सभी देशों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सस्ती और विकेंद्रीकृत जांच तथा इलाज की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। हर नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका मिलना चाहिए और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच में हेपेटाइटिस-बी की स्क्रीनिंग भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस से प्रभावित लोगों को नीति निर्माण में शामिल करना और बीमारी से जुड़े सामाजिक भेदभाव को खत्म करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य 2030 हासिल करने में अब केवल साढ़े तीन साल बचे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और पर्याप्त निवेश भी जरूरी है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर उन्होंने सभी देशों से आह्वान किया कि वे भेदभाव, असमानता और स्वास्थ्य सेवाओं की बाधाओं को खत्म कर हर व्यक्ति तक हेपेटाइटिस की रोकथाम, जांच और इलाज पहुंचाने का संकल्प लें।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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