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विशाखापत्तनम का अनोखा कनक महालक्ष्मी मंदिर, जहां बिना छत के विराजती हैं देवी लक्ष्मी

विशाखापत्तनम का अनोखा कनक महालक्ष्मी मंदिर, जहां बिना छत के विराजती हैं देवी लक्ष्मी
विशाखापत्तनम का अनोखा कनक महालक्ष्मी मंदिर, जहां बिना छत के विराजती हैं देवी लक्ष्मी

अमरावती, 2 नवंबर (आईएएनएस)। पूरे देश में इस वर्ष दिवाली का त्योहार 8 नवंबर को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए, लोग व्रत रखने के साथ निर्धारित नियमों का पालन करते हुए उनकी पूजा-अर्चना भगवान गणेश के साथ करेंगे।

इस शुभ दिन पर लोग अपने घरों को मिट्टी के दीयों, फूलों और रोशनी से सजाते हैं ताकि उनके घर पर देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहे और उनके धन-धान्य के भंडार कभी खाली न हों। दीपावली से पहले आइए हम आपको एक ऐसा प्राचीन और दिव्य मंदिर के बारे में बताते हैं, जो देवी लक्ष्मी को समर्पित है।

देश भर में विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित कई मंदिर हैं, जिनमें से कुछ अपनी दिव्य कृपा और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्हीं में से एक है, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित श्री कनक महालक्ष्मी मंदिर। यह मंदिर देवी लक्ष्मी के स्वरूप 'कनक महालक्ष्मी' को समर्पित है, जिन्हें विजाग शहर की संरक्षक देवी माना जाता है। इस मंदिर की खासियत है कि इसके ऊपर कोई छत या फिर गुंबद नहीं है। श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे देवी का दर्शन प्राप्त करने के साथ उनकी पूजा करते हैं। माना जाता है कि यहां देवी लक्ष्मी की प्रतिमा खुद प्रकट हुई थीं।

मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी के इस स्वरूप की मूर्ति एक कुएं से 1912 में मिली थी, हालांकि जब कुछ वर्षों बाद जब विकास का काम हो रहा था, उस दौरान देवी की मूर्ति को उस जगह से हटाया गया, तो शहर में प्लेग की बीमारी फैल गई, जिसके बाद इसे पुनः उसी स्थान पर स्थापित किया गया।

इस मंदिर की एक खासियत, जो इसको दूसरों से अलग बनाती है, वह यह है कि यहां पहुंचे श्रद्धालु देवी की पूजा-अर्चना सीधे तौर पर खुद से कर सकते हैं। मंदिर में कोई पुजारी अनिवार्य रूप से भक्तों की पूजा नहीं कराते। मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा और भक्ति से यहां आकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं, मां उनकी सभी मनोकामनाओं को पूरी करती है। वह अपने भक्तों को समृद्धि, सुरक्षा और सुख का आशीर्वाद देती हैं।

विशाखापत्तनम के लोगों के लिए यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल से कहीं बढ़कर है। यह उनकी पहचान, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता का दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां आते हैं।

श्री कनक महालक्ष्मी मंदिर सुबह 5 बजे से आधी रात 12 बजे तक खुला रहता है। दिवाली के दिन यह मंदिर बहुत ही भव्य दिखता है। यहां यह त्योहार बड़ी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

--आईएएनएस

डीके/वीसी

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