'वीजा न मिलने के कारण भारत के हाथ से निकले गोल्ड मेडल', डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने की अमेरिकी दूतावास की आलोचना
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष संजय सिंह ने अमेरिकी दूतावास की आलोचना की है। लास वेगास में जारी अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए 9 पहलवानों (ग्रीको-रोमन और महिला रेसलिंग कैटेगरी में) को वीजा नहीं दिया गया क्योंकि वह 20 साल से कम उम्र के थे और उनके पास कोई फुल-टाइम नौकरी नहीं थी।
'आईएएनएस' से बात करते हुए सिंह ने कहा कि टूर्नामेंट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है और यह पूरी तरह से अमेरिकी दूतावास की गलती है, जिसके कारण भारत गोल्ड मेडल जीतने से चूक गया। उन्होंने बताया कि 9 पहलवानों में से कम से कम दो गोल्ड मेडल जीतने के प्रबल दावेदार थे।
संजय सिंह ने बुधवार को बताया, "अमेरिकी दूतावास ने 9 भारतीय पहलवानों के वीजा इस आधार पर खारिज कर दिए कि वे बेरोजगार हैं। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। यहां तक कि यूडब्ल्यूडब्ल्यू के अध्यक्ष ने भी इस मामले को लेकर उन्हें पत्र लिखा था। वीजा न मिलना पूरी तरह से अमेरिकी दूतावास की गलती है और इसके परिणामस्वरूप भारत गोल्ड मेडल जीतने से चूक गया। जिन 9 पहलवानों को वीजा नहीं मिला, उनमें से कम से कम दो गोल्ड मेडल जीतने के प्रबल दावेदार थे। अमेरिकी दूतावास की गलती के कारण भारत को मेडल का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।"
10 सदस्यीय पुरुष फ्रीस्टाइल टीम को लास वेगास जाकर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन ग्रीको-रोमन और महिला टीमों को वीजा संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ा। अमेरिकी वीजा नहीं मिलने के कारण 9 पहलवान इन दोनों वर्गों की प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सके।
अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप की शुरुआत ग्रीको-रोमन मुकाबलों से हुई, जो 12 से 14 अक्टूबर तक आयोजित किए गए। इसके बाद महिला वर्ग की प्रतियोगिताएं 14 से 16 अक्टूबर तक चलेंगी। टूर्नामेंट का समापन पुरुष फ्रीस्टाइल मुकाबलों के साथ होगा, जिनका आयोजन 16 से 18 अक्टूबर तक किया जाएगा।
इस बीच, संजय सिंह ने बताया कि एक ग्रीको-रोमन पहलवान, विश्वजीत मोरे, वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला करेंगे। मोरे अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वाले भारत के एकमात्र ग्रीको-रोमन रेसलर हैं। मंगलवार को लास वेगास में हुई अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह अपने देश के पहले ग्रीको-रोमन फाइनलिस्ट बने।
अंडर-23 विश्व स्तर पर दो बार ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके मोरे ने शानदार शुरुआत करते हुए लगातार तीन कठिन मुकाबलों में जीत दर्ज की। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत मेक्सिको के इसाक मारिन माटा को 10-8 से हराकर की। इसके बाद मोरे का सामना अंडर-20 विश्व चैंपियन आर्मिन शमसीपुर से हुआ। शमसीपुर चोट से जूझते हुए नजर आए, लेकिन मोरे ने इसका पूरा फायदा उठाया। उन्होंने एक शानदार चार अंक का थ्रो लगाया और मुकाबला 8-1 से जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। मोरे ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाया और अपने विरोधी को संभलने का मौका नहीं दिया।
लंबे रिव्यू के बाद उन्होंने रूस के मलिक गिगिएव को 7-4 से हराकर 55 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में जगह बनाई। अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ग्रीको-रोमन में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर बनने के लिए मोरे को जॉर्जिया के कोबा कारुमिद्जे को हराना होगा। कारुमिद्जे का सेमीफाइनल भी किर्गिस्तान के बार्सबेक असानकोझोएव के खिलाफ काफी रोमांचक रहा था।
--आईएएनएस
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