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वीजा की निराशा से मियामी के सुइट तक: काबो वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा की मां कैसे फीफा वर्ल्ड कप तक पहुंचीं

मियामी, 22 जून (आईएएनएस)। काबो वर्डे ने 15 जून को 'ग्रुप-एच' के अपने पहले मैच में स्पेन के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेला। जब इस मुकाबले के बाद काबो वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा मैदान से बाहर निकले, तो उनका ध्यान हजारों मील दूर अपनी मां की ओर गया।
वीजा की निराशा से मियामी के सुइट तक: काबो वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा की मां कैसे फीफा वर्ल्ड कप तक पहुंचीं

मियामी, 22 जून (आईएएनएस)। काबो वर्डे ने 15 जून को 'ग्रुप-एच' के अपने पहले मैच में स्पेन के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेला। जब इस मुकाबले के बाद काबो वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा मैदान से बाहर निकले, तो उनका ध्यान हजारों मील दूर अपनी मां की ओर गया।

6 दिन बाद, एना कैंडिडा एवोरा मियामी में एक सुइट में थीं, जहां काबो वर्डे का मुकाबला उरुग्वे से हो रहा था। इस तरह उन्होंने एक ऐसा सफर पूरा किया, जो वर्ल्ड कप की सबसे चर्चित मानवीय कहानियों में से एक बन गया।

'सिन्हुआ' की रिपोर्ट के अनुसार, एना मियामी स्टेडियम में काबो वर्डे का झंडा लेकर और अपने बेटे का नाम और नंबर लिखी शर्ट पहनकर पहुंची थीं। मैच से पहले, उन्होंने फीफा की तरफ से जारी एक वीडियो में उन लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस यात्रा को मुमकिन बनाया।

उन्होंने कहा, "मैं उन सभी फैंस और लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, जिन्होंने इस प्रक्रिया में मेरी मदद की। साथ ही, उनका भी जो टीम का समर्थन करते हैं। हम सभी काबो वर्डे का समर्थन कर रहे हैं, ताकि वे अच्छा खेलें और मैदान पर शानदार प्रदर्शन करें।" अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने जोश के साथ कहा: "आगे बढ़ो, ब्लू शार्क्स।"

जब वार्म-अप के दौरान स्टेडियम की स्क्रीन पर वोजिन्हा दिखे और जब टीमों का परिचय कराया गया, तो फैंस ने उनका उत्साह बढ़ाया।

सोमवार को उरुग्वे के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ हुए मैच में गोलकीपर ने टीम को संभाले रखा। भले ही वे स्पेन के खिलाफ जितने अहम थे, उतने यहां नहीं दिखे। काबो वर्डे ने एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ तनावपूर्ण अंत के बावजूद एक और कीमती प्वाइंट हासिल किया।

वोजिन्हा ने स्पेन के खिलाफ गोल-रहित ड्रॉ मैच में सात बचाव किए और काबो वर्डे को अपने इतिहास का पहला वर्ल्ड कप प्वाइंट दिलाने में मदद की। फाइनल विसल के बाद, 40 वर्षीय खिलाड़ी ने उन परिवार के सदस्यों के बारे में बात की जिनके साथ वे इस पल को साझा करना चाहते थे।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं रोया, क्योंकि मैं अपने दादा-दादी के साथ बड़ा हुआ था, और दुर्भाग्य से, वे यहां नहीं थे। कुछ साल पहले उनका निधन हो गया था। वे मेरे लिए, मेरी जिंदगी के लिए सब कुछ थे। मैं इसलिए भी रोया क्योंकि वीजा की वजह से मेरी मां यहां नहीं आ सकीं।"

पश्चिमी अफ्रीका के पास काबो वर्डे द्वीप समूह का हिस्सा, साओ विसेंट द्वीप से एना ने मैच देखा और अपने बेटे के शानदार प्रदर्शन का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि उनके गोल में कोई भी गेंद नहीं जाएगी, और ठीक वैसा ही हुआ। वह एक बेहतरीन गोलकीपर हैं। मुझे वोजिन्हा की मां होने पर बहुत गर्व है। मुझे उम्मीद है कि वह अपनी तरफ आने वाली हर गेंद को रोकते रहेंगे।"

स्पेन के खिलाफ मैच में उनकी गैर-मौजूदगी को देखते हुए, काबो वर्डे के दूसरे ग्रुप मैच से पहले उन्हें अमेरिका भेजने की कोशिशें शुरू हुईं। मदद के लिए आगे आने वालों में लिन जी भी शामिल थे, जो 23 साल पहले चीन के झेजियांग प्रांत के वेनझोउ से काबो वर्डे आकर बस गए थे।

लिन ने कहा, "वोजिन्हा के कजिन मेरी पत्नी की कपड़ों की दुकान में काम करते थे। मैंने मदद करने की पेशकश की।" लिन, फीफा, काबो वर्डे फुटबॉल अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों की मदद से एना की यात्रा में आ रही रुकावटें आखिरकार दूर हो गईं।

24 घंटे से ज्यादा की यात्रा के बाद वह शुक्रवार को फ्लोरिडा पहुंचीं। वोजिन्हा के लिए, मियामी में उनकी मौजूदगी ने उनके करियर के सबसे बड़े पल को एक बहुत ही निजी और खास एहसास दिया। गोलकीपर ने बताया है कि प्रोफेशनल स्तर तक पहुंचने से पहले वह 25 साल के हो चुके थे और मुश्किल दौर में उन्होंने खेल छोड़ने के बारे में भी सोचा था।

वह नेशनल टीम का हिस्सा बने रहे, जबकि काबो वर्डे धीरे-धीरे ग्लोबल स्टेज के करीब पहुंचा और आखिरकार अपने पहले वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया। स्पेन के खिलाफ उन्होंने अपने करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। उरुग्वे के खिलाफ मैच देखने के लिए उनकी माँ भी वहां मौजूद थीं।

--आईएएनएस

आरएसजी

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