'विपक्ष सहयोग करे, बार-बार परामर्श की मांग अनुचित'; परिसीमन संशोधन पर रिजिजू ने खड़गे को लिखा पत्र
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। संसद में परिसीमन संविधान संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तकरार बढ़ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग के बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने जवाबी पत्र लिखा है।
रिजिजू की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है, "मैं आपको (मल्लिकार्जुन खड़गे) बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि आपने संसदीय कार्य मंत्रालय को पत्र लिखा। आपने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन पर विचार से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग की है। मैं इस विषय पर विपक्ष के साथ सरकार की कोशिशों के बारे में तथ्य दर्ज कर रहा हूं।"
पत्र में संसद को स्थगित न किए जाने के विपक्ष के आरोप पर सफाई दी गई है। सरकार ने कहा, "आपके इस अवलोकन के संबंध में कि 64 दिन बीत चुके हैं और संसद को स्थगित नहीं किया गया है, मैं साफ करना चाहूंगा कि कोई संवैधानिक जरूरत नहीं है कि सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के बाद कितने समय में स्थगित किया जाए। सिर्फ इतने समय तक स्थगित न होना कोई संवैधानिक अनियमितता नहीं है।"
रिजिजू ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी ऐसे मामले हुए हैं जब सदन लंबे समय तक स्थगित नहीं हुई। 2008 में लोकसभा विश्वास प्रस्ताव के लिए 21-22 जुलाई को बैठी थी, फिर स्थगित नहीं हुई और 17 अक्टूबर को फिर शुरू होकर 24 अक्टूबर को स्थगित हुई ताकि 10 दिसंबर को बैठक हो सके। इसके अलावा, 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 में 49 दिन, 2013 में 49 दिन और 1963 में 41 दिन तक सदन स्थगित नहीं हुआ था।
पत्र में आगे कहा गया है कि सरकार ने डिलिमिटेशन अमेंडमेंट बिल पर लगातार विपक्ष का सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा, "मैंने आपको 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को लिखा था। लिखित बातचीत के अलावा मैंने आपसे पर्सनली भी चर्चा की और सहयोग मांगा। मानसून सेशन के दौरान मैं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी मिला और सहयोग मांगा।"
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बाद भी कांग्रेस ने चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी, जिसके बाद डीएमके, एसपी, वाईएसआरसीपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजद सहित कई दलों से परामर्श किया गया।
पत्र में कहा गया, "ऐसे में समझ नहीं आता कि बार-बार परामर्श की मांग क्यों की जा रही है, जबकि सरकार पहले ही लगातार प्रयास कर चुकी है। अब विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की आवश्यकता है।"
अंतर में उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस रचनात्मक भूमिका निभाएगी और महत्वपूर्ण कानूनों के रास्ते में बाधा नहीं डालेगी।
--आईएएनएस
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