विपक्ष के नेताओं का आरोप: पुलिसिया कार्रवाई के जरिए जन आंदोलन को कुचला जा रहा
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) की तिरंगा यात्रा से पहले कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को दो दिन के लिए बंद किए जाने, एसआईआर, विपक्ष के प्रदर्शन और वकील प्रशांत भूषण के बयान पर विपक्ष के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी है।
कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 2 दिन के लिए बंद किए जाने पर आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "पूरे दिल्ली को ही भारत सरकार बंद करने के मूड में हैं। क्योंकि अब इनके बचाव के रास्ते सारे बंद हो चुके हैं। वोट चोरी का पोल खुल चुका है, उसके सबूत हैं देश के सामने। आज के दिन अब बचने के लिए दिल्ली को बंद कर रहे हैं। कभी जंतर-मंतर, कभी कनॉट प्लेस, कभी मार्च नहीं कर सकते, आप रैली नहीं कर सकते। तो यह दिल्ली बंद करने के लिए जिस तरीके से 1974 में इमरजेंसी की स्थिति थी और बंद कर दिए जा रहे थे और पुलिसिया कार्रवाई के बूते जन आंदोलन को कुचल देने का जो काम था, वह अब पूर्णतः दिखाई दे रहा है।"
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तिरंगा यात्रा से पहले बयान दिया है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इस बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने कहा, "वोट और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में हिरासत में लिए जाने का कोई मामला नहीं है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के बहुत कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जाता है। ऐसे में दिपके को यह मानकर चलना पड़ेगा कि पुलिस उन्हें हिरासत में लेगी।"
चुनाव आयोग द्वारा 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' के निर्देश पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, "मतदाता सूची से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इसकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जानी चाहिए ताकि लोग देख सकें कि किनके नाम हटाए गए हैं। हमारी मांग है कि इस प्रक्रिया को रद्द करके इसे फिर से कराया जाए। चुनाव आयोग ने ये कदम तब उठाए हैं, जब यह खुलासा हुआ कि कैसे कथित तौर पर अवैध तरीके से फॉर्म बदलकर वोट हटाए गए और मतदाताओं को जोड़ने व हटाने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत कर दिया गया।"
कांग्रेस के महासचिव और मीडिया संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा, "देश के लोगों को सुप्रीम कोर्ट और भारतीय न्याय प्रणाली पर भरोसा है। आज लोग उम्मीद भरी नजरों से न्यायपालिका की ओर देख रहे हैं। जब देश की स्वायत्त संस्थाएं सरकार के नियंत्रण में आ जाती हैं, तो पूरे देश के नागरिकों की आवाज बनने वाले विपक्ष के नेता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की मांग की। जहां तक नोटिस जारी करने की बात है, तो याचिकाकर्ता को नोटिस भेजना एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 'कोई हमें डरा-धमका नहीं सकता।' न्यायालय को डराने-धमकाने की कोशिश कोई नहीं कर रहा है। देश के लोग इस उम्मीद के साथ अदालत की ओर देख रहे हैं कि उन्हें यहां न्याय मिलेगा।"
वकील प्रशांत भूषण की 'सत्ता परिवर्तन' वाली टिप्पणी पर सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा, "हर कोई बार-बार यही बात कह रहा है कि देश के विकास के लिए सत्ता परिवर्तन जरूरी है। अमित शाह और उनकी पूरी टीम समाज और देश की संपत्ति को लूटने की कोशिश कर रही है। इसलिए, देश के विकास के लिए सत्ता परिवर्तन जरूरी है।"
शिवदासन ने कहा, "जब लोग सत्ताधारी पार्टी और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं या अपने विचार रखते हैं, तो सरकार उनसे देश छोड़ने के लिए कहती है, भले ही वे यहां के नागरिक हों। हमने असम, बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से ऐसी खबरें सुनी हैं। हर इंसान को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है।"
--आईएएनएस
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