विपक्ष का प्रोटेस्ट लोकतंत्र के लिए नहीं, परिवार बचाने के लिए है: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के बीच शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने विपक्षी दलों पर जोरदार पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष की रणनीति, चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के शासनकाल को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा, "मैंने यह कल भी कहा था और मैं आज फिर कह रहा हूं: मंगलवार को विपक्षी सांसदों का प्रोटेस्ट मार्च, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि वह लोकतंत्र बचाने के लिए है, असल में उनके अपने परिवारों को बचाने के लिए था। वे सड़कों पर इसलिए उतरे हैं क्योंकि इनमें से कई नेता अपनी पार्टियों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की तरह चलाते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आए हैं, इन दलों का राजनीतिक प्रभाव लगातार घटता जा रहा है और वे निरंतर चुनाव हार रहे हैं। उनकी पराजय के कारण अलग हैं, लेकिन उन कारणों को दूर करने के बजाय वे अपनी हार का पूरा ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ रहे हैं। इसलिए कभी वे एसआईआर के विरुद्ध बोलते हैं, कभी ईवीएम के विरुद्ध और अब मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध बोल रहे हैं। इन सब बातों का कोई औचित्य नहीं है।
शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना संविधान द्वारा की गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार होती है, इसलिए उन्हें हटाने का भी एक संवैधानिक प्रावधान है। अतः इस प्रकार की नाटकबाजी से कुछ हासिल नहीं होगा। उन्हें जमीन पर उतरकर लोगों के बीच जाना चाहिए और बुनियादी मुद्दों पर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसआईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जो संवैधानिक रूप से और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। इस प्रकार की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी होती थी। आप चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में केवल प्रधानमंत्री ही तय करते थे कि चुनाव आयुक्त कौन बनेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद एक नई व्यवस्था बनाई गई है, जिसके तहत एक समिति का गठन किया गया है और उस समिति में विपक्ष के नेता को भी शामिल किया गया है। यह पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी प्रणाली है।एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए संजय निरुपम ने कहा कि ये अब रियलिटी शो की तरह आंदोलन चला रहे हैं। इन्होंने स्वयं कहा है कि जंतर-मंतर पर सीजन-2 शुरू करने जा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का पूरा विषय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। न्यायालय ने उन्हें नोटिस जारी किया है और आने वाले दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दोनों चुनाव आयुक्तों को उस नोटिस का उत्तर देना है। एसआईआर से संबंधित आपके जो भी प्रश्न हैं, उन सभी पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। ऐसी परिस्थिति में जंतर-मंतर या कहीं और उतरकर आप अपनी राजनीति तो चमका सकते हैं, लेकिन उस आंदोलन का कोई परिणाम नहीं निकलेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के तौर पर 25 साल पूरे करने पर शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 25 सालों से लगातार सत्ता के शिखर पर बैठे हैं। उन्होंने लगभग 12 साल गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया, और पिछले 13 सालों से वे देश के प्रधानमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं।"
--आईएएनएस
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