विमान लैंडिंग गियर के लिए विकसित किया उन्नत एवं टिकाऊ मैटेरियल
नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। हल्के वजन वाला एक ऐसा मैटेरियल विकसित किया गया है, जिसका उपयोग विमान के लिए मजबूत और टिकाऊ लैंडिंग गियर बनाने में किया जा सकता है। दरअसल, विमान को लैंड कराने में लैंडिंग गियर को काफी घिसाव और दबाव को सहने पड़ता। यही कारण है कि इसे अत्यधिक टिकाऊ होना आवश्यक है। अब केंद्रीय शिक्षण संस्थान एनआईटी राउरकेला के एक रिसर्च ग्रुप ने इसका समाधान विकसित किया है। एनआईटी ने एक खास नैनोकॉम्पोजिट विकसित किया है।
बता दें कि नैनोकॉम्पोजिट ऐसे पदार्थ होते हैं जो नैनो स्तर पर विभिन्न सामग्रियों के मिश्रण से बनते हैं और ये मानव बाल से 100,000 गुना पतले होते हैं। यह रक्षा विमानों और मानवरहित हवाई वाहनों में उपयोग के लिए उपयुक्त है। यहां इन विमानों में हल्कापन और टिकाऊपन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह संरचनात्मक विश्वसनीयता बढ़ाकर सुरक्षित और कुशल एयरोस्पेस संचालन में योगदान दे सकता है। वर्तमान में उपयोग में आने वाले अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील, टाइटेनियम मिश्रधातु और उच्च-शक्ति एल्यूमिनियम मिश्रधातुओं की तुलना में, यह नैनोकॉम्पोजिट लगभग 40–60 प्रतिशत अधिक लागत-प्रभावी हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि इस मैटेरियल का हल्कापन और घिसाव प्रतिरोध का संयोजन लैंडिंग गियर को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाएगा। कम रखरखाव लागत और बेहतर विश्वसनीयता जैसे लाभों के साथ, यह नैनोकॉम्पोजिट ऊर्जा-संकटग्रस्त दुनिया में परिवर्तनकारी प्रभाव डाल सकता है। अगले चरण में टीम पाउडर मेटलर्जी तकनीक के माध्यम से इन हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट से बड़े आकार के घटक विकसित करने पर काम कर रही है। भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप यह नवाचार अगली पीढ़ी के एयरोस्पेस मैटेरियल्स में एक महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
दरअसल, आमतौर पर एल्यूमिनियम और उसकी मिश्रधातुओं से बने लैंडिंग गियर विमान का भार सहने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इन लैंडिंग गियर को विमान की लैंडिंग के दौरान रनवे के संपर्क को भी सहना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में यह मैटेरियल जल्दी घिस जाते हैं। हालांकि, एल्यूमिनियम हल्का होता है, लेकिन अत्यधिक दबाव में इसका टिकाऊपन एक चुनौती बना रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए एनआईटी राउरकेला के मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग एक नवीन नैनोकॉम्पोजिट मैटेरियल विकसित किया है। इस मैटेरियल का उपयोग विमान लैंडिंग गियर में किया जा सकता है। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित मैटेरियल्स लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
एनआईटी के मुताबिक वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए, शोधकर्ताओं ने बेहतर दाब-सहन क्षमता और भार वितरण क्षमता के लिए कार्बन नैनोट्यूब का उपयोग किया। इसे अधिक मजबूती देने के लिए ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स से जोड़ा गया। मिश्रण को तापीय रूप से स्थिर बनाने के लिए हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का उपयोग किया गया। एल्यूमिनियम मैट्रिक्स में कणों के समान वितरण के लिए उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग किया गया, जिससे एल्यूमिनियम की मजबूती और कठोरता में सुधार हुआ। इसके बाद मिश्रण को उच्च दाब वाले ऑक्सीजन-रहित वातावरण में गर्म कर दबाया गया, जिससे एक सघन और मजबूत बंधित नैनोकॉम्पोज़िट प्राप्त हुआ, जो एयरोस्पेस उपयोग के लिए उपयुक्त है।
यह रिसर्च प्रो. सैयद नसीमुल आलम ने अपने शोध दल, डॉ. अर्का घोष, डॉ. आशुतोष दास, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, नित्यानंद साहू, पार्थ पटेल, तथा दक्षिण अफ्रीका विश्वविद्यालय के डॉ. वेलाफी मसोमी के साथ मिलकर की है।
प्रो. सैयद नसीमुल आलम ने कहा, “स्पार्क प्लाज्मा सिंटरिंग द्वारा विकसित एल्यूमिनियम-आधारित हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट में नैनोफिलर का समान वितरण होता है। यह भार-वहन की समन्वित प्रक्रिया के कारण उत्कृष्ट घिसाव प्रतिरोध प्रदर्शित करता है। यह प्रक्रिया त्रि-आयामी सुदृढ़ीकरण नेटवर्क (थ्री डिमेन्शनल रीइन्फोर्सिंग नेटवर्क) बनाती है, जो भार हस्तांतरण और संरचनात्मक स्थिरता को बढ़ाती है। सतह पर बनने वाली एक पतली सुरक्षात्मक परत के कारण घिसाव में उल्लेखनीय कमी देखी गई।”
--आईएएनएस
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