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'विकसित भारत' की वित्तीय यात्रा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राज्यों और विशेषज्ञों ने तय किया आगे का रोडमैप

'विकसित भारत' की वित्तीय यात्रा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राज्यों और विशेषज्ञों ने तय किया आगे का रोडमैप
'विकसित भारत' की वित्तीय यात्रा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राज्यों और विशेषज्ञों ने तय किया आगे का रोडमैप

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "फाइनेंसिंग इंडिया'स जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत" शनिवार को संपन्न हो गया। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों, वित्त सचिवों, शिक्षाविदों, उद्योग, बैंकिंग और नीति-निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तीय जरूरतों और सतत एवं समावेशी विकास के रास्तों पर व्यापक मंथन किया।

सम्मेलन में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री के साथ असम, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, केरल, मणिपुर, मेघालय और नागालैंड के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, बिहार और ओडिशा के उपमुख्यमंत्री तथा आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि यह अपनी तरह का पहला सम्मेलन है, जिसमें सार्वजनिक और निजी वित्त से जुड़े दीर्घकालिक मुद्दों पर राज्यों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत साझेदारी और पूरक सहयोग पर आधारित होगी।

अनुराधा ठाकुर ने कहा कि पिछले 16-17 महीनों में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भारत की संप्रभु रेटिंग में चार बार सुधार किया है। हाल ही में जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआर) ने भारत की रेटिंग बीबीबी+ से बढ़ाकर ए- कर दी है, जो देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता और वित्तीय अनुशासन की वैश्विक मान्यता है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी बजट के जरिए हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए निजी क्षेत्र की पूंजी, नवोन्मेषी वित्तीय तंत्र और केंद्र-राज्य सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्यों की भागीदारी के साथ विभिन्न कार्य समूह गठित किए जाएंगे, जो क्षेत्रवार वित्तीय आवश्यकताओं और ठोस सुझावों पर काम करेंगे।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता और 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है और यह देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए 7-8 प्रतिशत की सतत विकास दर बनाए रखने हेतु सकल घरेलू बचत दर को मौजूदा लगभग 34 प्रतिशत से बढ़ाकर 38-40 प्रतिशत तक ले जाना होगा।

एन.के. सिंह ने राज्यों के लिए ऋण स्थिरता का अलग-अलग आकलन, ऑफ-बजट उधारी और गारंटी जैसी देनदारियों में अधिक पारदर्शिता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग के जरिए कर अनुपालन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वित्त से आगे बढ़कर निजी पूंजी को विकास का प्रमुख आधार बनाना होगा और सरकार की भूमिका उत्प्रेरक की होनी चाहिए।

सम्मेलन में व्यापक आर्थिक परिदृश्य, बचत और निवेश दर बढ़ाने, राज्यों के लिए वित्तीय "गोल्डन रूल", राजकोषीय मजबूती और संसाधन जुटाने जैसे विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. सज्जिद चिनॉय, सिटीबैंक के डॉ. समीरन चक्रवर्ती, प्रोफेसर अशिमा गोयल और प्रोफेसर एन.आर. भानुमूर्ति सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

सम्मेलन के विशेष सत्र में कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक उदय कोटक ने भी विकसित भारत के वित्तपोषण में निजी निवेश और वित्तीय क्षेत्र की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

--आईएएनएस

डीएससी

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