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विकसित भारत के लिए तकनीक और नवाचार में सक्षम बनना जरूरी: राजनाथ सिंह

विकसित भारत के लिए तकनीक और नवाचार में सक्षम बनना जरूरी: राजनाथ सिंह
विकसित भारत के लिए तकनीक और नवाचार में सक्षम बनना जरूरी: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल बड़ी अर्थव्यवस्था बनना नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा राष्ट्र बनाना है, जो तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी, नवाचार में अग्रणी और अपना भविष्य स्वयं तय करने में आत्मविश्वासी हो। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत को केवल दूसरे देशों में विकसित ज्ञान और तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि नई तकनीकों और ज्ञान के निर्माण में योगदान देने वाला राष्ट्र बनना होगा।

राजनाथ सिंह बुधवार को नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरत का अर्थ केवल देश की सीमाओं के भीतर अधिक उत्पादन करना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ अपनी सोचने, अभिकल्प तैयार करने, निर्माण करने और नवाचार करने की क्षमता विकसित करना है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में औद्योगिक विकास केवल बुनियादी ढांचे, निवेश और विनिर्माण क्षमता पर निर्भर नहीं रहेगा। इसमें तकनीक, नवाचार, उत्पादकता और कुशल मानव संसाधन की भूमिका लगातार बढ़ेगी। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर वैज्ञानिक शोध और औद्योगिक उपयोग के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। यह संस्थान उभरती तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाने के साथ युवाओं की आकांक्षाओं और बदलती अर्थव्यवस्था में पैदा हो रहे अवसरों के बीच भी सेतु का काम कर सकता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के आईआईटी संस्थानों का उद्देश्य केवल इंजीनियर और वैज्ञानिक तैयार करना नहीं रहा है। उनका व्यापक लक्ष्य मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। आईआईटी से निकली पीढ़ियों ने अपने ज्ञान, प्रतिभा और उद्यमशीलता के माध्यम से देश की प्रगति से जुड़ी अनेक चुनौतियों का समाधान करने में योगदान दिया है।

रक्षा मंत्री ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों से जुड़े नवाचार और उद्यमशीलता का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। अगस्त 2025 तक आईआईटी से जुड़े तंत्र ने 6,000 से अधिक नवोद्यमों को सहयोग दिया था। इसी तंत्र से 56 यूनिकॉर्न सामने आए और लगभग 5,000 पेटेंट दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां बताती हैं कि आईआईटी अब केवल शिक्षा देने वाले संस्थान नहीं रह गए हैं। वे नवाचार, उद्यमशीलता और तकनीकी क्षमता के विकास के प्रमुख केंद्र भी बन रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आईआईटी कानपुर जैसे संस्थान के योगदान का आकलन केवल वहां से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थियों या प्रकाशित होने वाले शोधपत्रों की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसका वास्तविक प्रभाव उन तकनीकों में भी दिखाई देता है, जिन्हें वहां के पूर्व विद्यार्थी विकसित करते हैं, उन उद्यमों में भी दिखता है जिन्हें वे खड़ा करते हैं, और उन समस्याओं के समाधान में भी नजर आता है, जिनसे दूसरे लोगों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी संस्थान का ज्ञान और नवाचार विभिन्न क्षेत्रों तथा पीढ़ियों तक पहुंचता है, तो राष्ट्र निर्माण में उसका योगदान कई गुना बढ़ जाता है।

रक्षा मंत्री ने आईआईटी कानपुर में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), उद्योग और शिक्षाविदों के सहयोग से स्थापित उत्कृष्टता केंद्र का उल्लेख किया। उन्होंने इसे शोध और व्यावहारिक जरूरतों को जोड़ने का अच्छा उदाहरण बताया। उन्होंने संस्थान में रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी प्रसन्नता जताई।

उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से शैक्षणिक शोध और रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के बीच सहयोग मजबूत हो सकता है। इससे वैज्ञानिक उपलब्धियों को रणनीतिक महत्व वाली तकनीकों में बदलने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमता विकसित करने के लिए ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे शोध संस्थानों में विकसित ज्ञान को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप उपयोग में लाने के अवसर बढ़ते हैं।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी

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