'विकसित भारत-जी राम जी' योजना को लेकर जनता को गुमराह कर रही कांग्रेसः बाबूलाल मरांडी
रांची, 6 जनवरी (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना मील का पत्थर साबित होगी और यह महात्मा गांधी के रामराज्य के सपनों को जमीन पर उतारेगी। उन्होंने मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस पर निशाना साधा।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस खुद भ्रम, हताशा और निराशा की स्थिति में है, इसलिए वह 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना को लेकर जनता को गुमराह कर रही है। मरांडी ने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि 'विकसित भारत-जी राम जी' का लक्ष्य गांव-गरीब, किसान, मजदूरों का कल्याण और भ्रष्टाचार-मुक्त ग्राम विकास है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा लंबे समय तक भ्रष्टाचार और लूट का केंद्र बना रहा। झारखंड सहित देश के कई राज्यों में मनरेगा घोटाले सामने आए।
खूंटी जिले में 24 करोड़ रुपए के गबन में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के जेल जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 23 राज्यों में कागजों पर ऐसे कार्य दिखाए गए, जिनका जमीनी अस्तित्व नहीं था। श्रम आधारित कार्यों में मशीनों के इस्तेमाल और 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी की शिकायतें भी उजागर हुईं।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद केवल 7.61 प्रतिशत परिवार ही 100 दिन का रोजगार पूरा कर सके। हालांकि, मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में पारदर्शिता बढ़ाने के कई प्रयास किए, जिससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ी और सक्रिय श्रमिकों की संख्या 12.11 करोड़ तक पहुंची, लेकिन डिजिटल भुगतान के बावजूद गड़बड़ियां जारी रहीं।
मरांडी ने कहा कि इन्हीं अनुभवों के आधार पर 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' नामक नया अधिनियम लाया गया है, जो 20 वर्ष पुराने मनरेगा का विकसित और व्यापक स्वरूप है। इसके तहत अब 100 के बजाय 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है। योजना में जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, रोजगार सृजन से जुड़े निर्माण और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया गया है। पारदर्शिता के लिए एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान, जीपीएस मोबाइल निगरानी, साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण और पंचायत स्तर पर सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि कृषि सीजन में 60 दिन की 'नो वर्क अवधि' रखी गई है ताकि मजदूर खेती में लग सकें, जबकि शेष अवधि में 125 दिन का रोजगार और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार का व्यय अनुपात 60:40 रहेगा। मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को गांव, गरीब और मजदूरों के हित में सुधार से परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर योजना की खूबियां बताएंगे और कांग्रेस के दुष्प्रचार का जवाब देंगे।
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