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‘विकास’ से निराश और हताश हो चुके हैं दिग्विजय सिंह: बाबूराम निषाद

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के 'लोकतंत्र खतरे में है' वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास से परेशानी है। इसी वजह से वे निराश और हताश होकर ऐसे बयान देते रहते हैं।
‘विकास’ से निराश और हताश हो चुके हैं दिग्विजय सिंह: बाबूराम निषाद

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के 'लोकतंत्र खतरे में है' वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास से परेशानी है। इसी वजह से वे निराश और हताश होकर ऐसे बयान देते रहते हैं।

दिग्विजय ने कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है, और उसका कारण यह है कि देश में आजादी और बंटवारे के बाद जो सौहार्दपूर्ण वातावरण पैदा किया गया था, वह धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। कट्टरपंथी ताकतें धार्मिक उन्माद फैलाकर एक तरफ हिंदुओं और दूसरी तरफ मुसलमानों को भड़का रही हैं। जो सौहार्दपूर्ण वातावरण बना हुआ था, उसमें अब हम लोगों को संकट नजर आ रहा है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे नेता जनता को भड़काने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। उन्हें खतरा इस बात का महसूस हो रहा है कि पीएम मोदी की नीतियों के तहत फायदा लगातार गांवों, गरीबों, किसानों और मजदूरों तक पहुंच रहा है। इस बजट और पिछले कई बजटों के माध्यम से देश का जो कायाकल्प हुआ है, उसे देखकर वे घबरा गए हैं। अब उनकी कोई भी पुरानी नीति चलने वाली नहीं है। कांग्रेस ने हमेशा जातिवाद, तुष्टिकरण की राजनीति को अपनाया, क्षेत्रवाद और सामंतवाद को बढ़ावा दिया। यह सब अब खत्म हो चुका है। अब विकास का युग शुरू हो गया है।

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि कांग्रेस के जमाने में जितने दंगे हुए, ऐसी मिसाल कहीं और नहीं मिलती। भाजपा को दिग्विजय सिंह क्या सिखाएंगे। वे सिर्फ बेतुके और निराधार बयान देते रहते हैं।

राहुल गांधी के चीन संबंधित बयान पर सदन में हुए हंगामे पर भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि संसदीय मर्यादा का सम्मान करते हुए राहुल गांधी को बोलना चाहिए। राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। उन्हें मर्यादा की सीमाओं में रहकर बोलना चाहिए, क्योंकि वे जैसा बोलते हैं, दूसरे सांसद उनसे सीखते हैं। अगर वे खुद मर्यादा का उल्लंघन करेंगे, तो व्यवस्था कैसे चलेगी?

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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