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विक्रम मिस्री ने किया 'भाविनी' और आईआईटी मद्रास का दौरा, छात्रों से बोले- 'आपकी भूमिका महत्वपूर्ण'

नई दिल्ली/कल्पक्कम, 6 जून (आईएएनएस)। विदेश सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य विक्रम मिस्री ने विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) को तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास का दौरा किया। शनिवार को एक्स पर इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दी।
विक्रम मिस्री ने किया 'भाविनी' और आईआईटी मद्रास का दौरा, छात्रों से बोले- 'आपकी भूमिका महत्वपूर्ण'

नई दिल्ली/कल्पक्कम, 6 जून (आईएएनएस)। विदेश सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य विक्रम मिस्री ने विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) को तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास का दौरा किया। शनिवार को एक्स पर इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दी।

भाविनी में वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बात की। मिस्री ने यहां, भारत के अत्याधुनिक 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) की प्रगति की जानकारी प्राप्त की।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विदेश सचिव ने भाविनी परिसर में बकुल (मौलश्री) का पौधा भी लगाया।

मिस्री ने 5 जून 2026 को ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (आईआईटी) में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के डिग्री वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। समारोह में विभिन्न देशों से आए छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में विक्रम मिस्री ने स्नातक होने वाले सभी छात्रों को बधाई दी और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, " आज दुनिया तेजी से तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।"

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे आईआईटी मद्रास में अर्जित ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग मानवता के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान तथा वैश्विक दक्षिण के देशों के विकास में योगदान देने के लिए करें।

इसी वर्ष 6 अप्रैल 2026 की रात भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने सफलतापूर्वक फर्स्ट क्रिटिकलिटी हासिल कर ली थी। यह वह चरण होता है जब रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु विखंडन शुरू हो जाता है।

यह उपलब्धि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। इस रिएक्टर की तकनीक और डिजाइन का विकास पूरी तरह से भारत में ही किया गया है। इसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया है, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। वहीं इसके निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी भाविनी को दी गई थी, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा रणनीति का एक अहम हिस्सा हैं। पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों के विपरीत, इनमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) फ्यूल का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक न केवल ऊर्जा उत्पादन को अधिक कुशल बनाती है, बल्कि ईंधन उपयोग की क्षमता को भी बढ़ाती है, जिससे भविष्य में ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।

--आईएएनएस

केआर/

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