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वीर सावरकर की जयंती पर फिर उठी भारत रत्न देने की मांग, नेताओं ने कहा- आजादी में रहा महत्वपूर्ण योगदान

मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। वीर सावरकर की 143वीं जयंती के मौके पर एक बार फिर उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की मांग तेज हो गई है। भाजपा और शिवसेना के नेताओं का कहना है कि वीर सावरकर ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए उन्हें ये सम्मान मिलना ही चाहिए।
वीर सावरकर की जयंती पर फिर उठी भारत रत्न देने की मांग, नेताओं ने कहा- आजादी में रहा महत्वपूर्ण योगदान

मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। वीर सावरकर की 143वीं जयंती के मौके पर एक बार फिर उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की मांग तेज हो गई है। भाजपा और शिवसेना के नेताओं का कहना है कि वीर सावरकर ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए उन्हें ये सम्मान मिलना ही चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि देश की आजादी में विनायक दामोदर सावरकर का योगदान बहुत बड़ा रहा है और इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके लिए उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। देश की आजादी में वीर सावरकर का योगदान बहुत बड़ा है। हमने भी मांग की है। विधानसभा में भी हमने एकमत से प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार को भेजा था। हम निश्चित रूप से उस पर भी अमल करेंगे।"

इसी तरह शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने भी सावरकर को भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से यह मांग करती आ रही है कि सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाए। उनके अनुसार अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार इस पर ठोस फैसला ले और जल्द से जल्द इसकी घोषणा करे। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ उनकी पार्टी की नहीं, बल्कि कई लोगों की भावना है कि सावरकर के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान मिलना चाहिए।

वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक सेमिनार के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी सावरकर को याद किया। उन्होंने महंत अवैद्यनाथ और सावरकर दोनों की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उनके योगदान पर बात की। कृष्णम ने कहा कि सावरकर ने देश की आजादी के लिए बड़ा संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

उन्होंने कहा, "देश की आजादी के बाद भी वीर सावरकर को जो न्याय मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह पहला ऐसा दशक है जब वीर सावरकर को महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित करने का फैसला लिया गया।"

--आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी

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